छत्तीसगढ़ प्रदेश से कांग्रेस शासन तो समाप्त हो गयी।लेकिन कांग्रेस की ओर से शुरू की गई मुहिम रोका छेका आज भी जिंदा है।इसे जिंदा भी शहर में वर्षों से घूम रहे मवेशियों खासकर सांडों ने रखा है।अक्सर रोका छेका अभियान की धज्जियां उड़ाते सांडों को शहर के प्रमुख सड़कों में एक दूसरे से लड़ते हुए देखा जा सकता है।इसी तरह का एक नज़ारा गांधी चौक से दयालबंद जाने वाले मल्टी परपस स्कूल के सामने प्रमुख मार्ग पर देखने को मिला।जहां आपस मे लड़ रहे दो सांड राहगीरों को रोकते छेकते नजर आए।

इतना ही नही इनके बीच हुए जबरदस्त लड़ाई को देखने के लिए भी यहां आसपास भीड़ एकत्रित हो गयी।सभी राहगीर अपने अपने वाहनों को दूर में खड़ी कर इनके लड़ाई खत्म होने का इन्तेजार करने लगे।इसी बीच जल्दबाजी में इसी मार्ग से गुजर रहे दो बाइक सवार भी सांडों की लड़ाई की चपेट में आ गए और बुरी तरह घायल हो गए। उनकी बाइक भी क्षतिग्रस्त हुई।जब सांडों की लड़ाई शांत हुई तब जाकर फिर से गांधी चौक से दयालबंद जाने वाले राहगीरों का आवागमन शुरू हो पाया।



