बिलासपुर में जल संकट कोई नई समस्या नहीं है। खासतौर पर बिलासपुर के वह इलाके जो इंडस्ट्रियल एरिया में आते है। उन क्षेत्रों में गर्मी आते ही कई बोरवेल फेल हो जाते हैं। बिलासपुर शहर के कई इलाकों में गर्मियों के बढ़ते तापमान के साथ जल संकट शुरू हो जाता है। खास तौर पर बिलासपुर के वो इलाके जो औद्योगिक क्षेत्रों में आते हैं। बिलासपुर के तिफरा और सिरगिट्टी इंडस्ट्रियल के आस पास नगर निगम के करीब 6 वार्ड आते हैं। जहां करीब 50 हजार रहवासी निवास करते हैं। इन रहवासियों में अधिकांश स्लम इलाकों में रहते है। जो जल आपूर्ति के लिए सरकारी सप्लाई और हैंडपंप पर निर्भर होते हैं। लेकिन साल भर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमिगत जल के दोहन के परिणाम स्वरूप यहां का जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। गर्मियों में तो हालत ये होती है कि कई इलाकों के बोरवेल्स पूरी तरह सुख जाते है। गर्मियों में होने वाली समस्या को तात्कालिक तौर पर तो टैंकर और अन्य साधनों से समाधान कर लिया जाता है। लेकिन दिनों दिन गहराती इस समस्या ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इधर औद्योगिक उपयोग की वजह से गहराती जा रही इस समस्या के कारण उत्पन्न हो रहे जल संकट से लोगों को बचाना निगम प्रशासन और नवगठित शहर सरकार की प्राथमिकता है। शहर सरकार ने निगम के सभी 70 वार्डों में जल संकट से उत्पन्न होने वाली स्थिति को देखते हुए बैठक और पत्राचार किया है और जल्द ही इस पर एक्शन भी लिया जाएगा। दूसरी ओर निगम अधिकारी आने वाले दिनों में जलसंकट के स्थाई समाधान की बात कह रहे हैं। अधिकारियों का कहना है, अर्बन वार्डों में अमृत मिशन के फेज वन से जलापूर्ति की तैयारी है। वहीं रूरल वार्डों के लिए अमृत मिशन के फेज टू की तैयारी है। ताकि, पूरे नगर निगम में पेयजल आपूर्ति की स्थाई व्यवस्था बनाई जा सके।बहरहाल, यह समस्या सिर्फ गर्मी के मौसम के नहीं बल्कि आने वाले दिनों में हमेशा की भी हो सकती है। क्योंकि इन इलाकों में जितनी मात्रा में पानी का उपयोग किया जा रहा है। उतनी मात्रा में अंडरग्राउंड वॉटर रिचार्ज नहीं हो रहा है और यही कारण है कि हर आते हुए साल के साथ यह समस्या गहराती जा रही है।




