शासन के द्वारा प्रदेश भर में लोगों को हर महीने राशन दुकानों के माध्यम से चावल उपलब्ध कराया जाता है लेकिन पिछले कुछ समय से प्रशासन ने बायोमेट्रिक की व्यवस्था कर दी है जिस पर सत्यापित करने के बाद ही लोगों को चावल उपलब्ध हो पता है लेकिन देखा जा रहा है कि इसमें भी भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आने लगी है दरअसल सोमवार को बड़ी संख्या में महिलाएं बिलासपुर कलेक्ट्रेट पहुंची जहां उन्होंने कलेक्टर के समक्ष अपनी मांगों को रखते हुए कहा कि यहां मौजूद राशन दुकान संचालक के द्वारा उनके बायोमेट्रिक में फिंगरप्रिंट लेकर सत्यापित तो कर दिया गया लेकिन उन्हें चावल नहीं दिया जा रहा है ऐसे लगभग 1200 से अधिक कार्ड हितग्राही है जिनका फिंगरप्रिंट लेने के बाद भी चावल नहीं दिया जा रहा है इसकी शिकायत उन्होंने मस्तूरी तहसील मैं भी की है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलने की वजह से महिलाएं बड़ी संख्या में बिलासपुर कलेक्ट्रेट पहुंची है उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां से उन्हें न्याय मिलेगा और उनके हक का जो चावल है उन्हें प्राप्त होगा निश्चित तौर पर ग्रामीण अंचलों में जिस तरह से भ्रष्टाचार को लेकर मामले सामने आ रहे हैं वह कहीं ना कहीं सरकार को भी इस दिशा में सोने मजबूर कर रहा है यह तो केवल मस्तूरी का ही मामला सामने आया है ऐसे ही अन्य कई मामले अन्य ग्रामीण अंचलों में भी है जहां से भी अब धीरे-धीरे मामले सामने आने लगे हैं ऐसे में इस दिशा में शासन को और जिला प्रशासन को ध्यान देकर हितग्राहियों का हक उन्हें दिलाना होगा और ऐसे कार्य करने वाले लोगों पर कठोर कार्रवाई करनी होगी।




