पारंपरिक गीतों से गूंज उठा विसर्जन स्थल,भोजली का हुआ विसर्जन ,बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल हुए शामिल कहा गौरवशाली परंपरा को जीवंत रखना जरूरी…

बिलासपुर- हर साल की तरह इस साल भी रक्षाबंधन के अगले दिन रविवार को शहर के तोरवा पचरी घाट मंगल में भोजली महोत्सव मनाया गया छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला भोजली पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि यह सामाजिक रिश्तों और दोस्ती की डोर को भी मजबूत करता है वर्षों से निभाई जा रही यह परंपरा आज भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उतने ही उत्साह के साथ जीवंत है। छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्योहार भोजली को लेकर सुबह से ही उत्साह का माहौल देखा गया वही पचरी घाट में कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें सबसे पहले छत्तीसगढ़ महतारी की तेल चित्र के सामने दी प्रचलित किया गया इसके बाद एक-एक कर महिलाएं भोजली ली हुई पहुंचती रही हरे पीले रंग की मनमोहक भोजली देखने लोगों की काफी भीड़ रही इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल शामिल हुए जिन्होंने भोजली टीम का उत्सुकता को देख खुशी जाहिर की और इस आयोजन के लिए भोजली महोत्सव समिति को शुभकामनाएं दी उन्होंने कहा कि आज भी हमारा सनातन संस्कृति अक्षुण्ण है इसका मुख्य कारण हमारी इस गौरवशाली परंपरा को जीवंत रखना है इसकी गहराई में जाए तो यह समझ में समरसता एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव प्रदर्शित करने वाला उत्साह है वही उत्सव समिति के लोगों ने भी भोजली को लेकर कहा की परंपरा के इस पर्व को हर साल खुशी और उमंग के साथ मनाया जाता है महिलाएं और युवतियां भी यह उत्साह के साथ भोजली विसर्जन करने पहुंचती रही।

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