महामाया माता को अर्पित की गई चुनरी, आदिवासी समाज की परंपरा जीवंत,बादल महल से निकली पदयात्रा, ध्वज पताका के साथ पहुँचे श्रद्धालु

रविवार को जिला सर्व आदिवासी समाज बिलासपुर एवं गोंडवाना समाज रतनपुर इकाई द्वारा पारंपरिक तरीके से माँ महामाया को चुनरी अर्पित की गई। इस मौके पर समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा, बाजे-गाजे और आतिशबाजी के साथ बड़ी संख्या में शामिल हुए।पदयात्रा रैली रतनपुर के बादल महल जूना शहर से प्रारंभ हुई और मां महामाया मंदिर पहुंचकर ध्वज पताका के साथ पूजा-अर्चना की गई। समाज के लोगों ने अन्न भोग लगाकर देवी से सुख-समृद्धि की कामना की।इस आयोजन का उद्देश्य विलुप्त हो रही प्रथा-परंपरा को संरक्षित करना और समाज की धरोहर को पुनः स्थापित करना रहा। माँ महामाया को गोंडवाना आदिवासी समाज की कुल देवी माना जाता है और इसी आस्था को पुनर्जीवित करने के लिए यह आयोजन किया गया।इस अवसर पर सुभाष सिंह परते, युवराज सिंह प्रधान, मनोहर सिंह राज, पूर्व IG भरत सिंह, डॉ. संतोष उद्देश्य, आयुष सिंह राज सहित अनेक सामाजिकजन उपस्थित थे। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से रतनपुर का माहौल भक्तिमय हो गया।

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