
शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बावजूद जिले में शिक्षा विभाग के कई शिक्षक आज भी अपने मूल विभाग से हटकर अन्य कार्यालयों और विभागों में कार्यरत हैं। इसका सीधा असर स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। जहां शिक्षकों की कमी पहले से ही चिंता का विषय है, वहीं उपलब्ध शिक्षक भी कक्षाओं से बाहर रहकर बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि यदि शिक्षक स्कूलों में मौजूद नहीं रहेंगे तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी। कुछ स्कूलों में तो स्थिति यह है कि एक शिक्षक को कई कक्षाओं को एक साथ संभालना पड़ रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि शासन की मंशा बेहतर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी ही उसका पालन नहीं कर रहे। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने बताया कि जिले में ऐसे मामलों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी शिक्षक को दूसरे विभाग में संलग्न पाया जाता है तो उसे तत्काल उसके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा जाएगा। डीईओ ने यह भी कहा कि शासन के आदेशों का उल्लंघन किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वर्तमान व्यवस्था में शिक्षकों को अन्य विभागों में भेजे जाने से शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है। कुल मिलाकर मामला अब कार्रवाई की मांग कर रहा है। सवाल यह है कि बच्चे कब तक इस अव्यवस्था का खामियाजा भुगतते रहेंगे और शिक्षकों को उनकी वास्तविक जिम्मेदारी यानी कक्षा में पढ़ाने के लिए कब तक वापस भेजा जाएगा।


