
छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल उन्मूलन के प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति के तहत अब तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें कुल 210 नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने की घोषणा की। रिज़र्व पुलिस लाइन में आयोजित इस कार्यक्रम में आत्मसमर्पण करने वालों में कई टॉप कमांडर और सक्रिय सदस्य शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान नक्सलियों के पास से 153 हथियार बरामद किए गए, जिनमें आधुनिक राइफलों से लेकर देसी हथियार तक शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इसे बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ छेड़े गए अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है। प्रशासन का कहना है कि सरेंडर करने वालों को पुनर्वास नीति के तहत रोजगार, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान दिया जाएगा। इस मौके पर प्रदेश के डिप्टी सीएम अरुण साव ने इसे पूरे देश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि “जब इतने बड़े पैमाने पर नक्सली हिंसा छोड़कर संविधान और विकास के रास्ते पर लौट रहे हैं, तो यह साबित करता है कि देश बदल रहा है और बस्तर भी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि अपने संबोधन में डिप्टी सीएम साव ने राजनीतिक तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि “2003 से बीजेपी सरकार नक्सलवाद के खिलाफ काम कर रही थी, लेकिन 2018 से कांग्रेस सरकार ने नक्सलवाद को बढ़ावा देने का काम किया।” उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में विष्णुदेव साय सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के तहत नक्सल उन्मूलन नीति पर ठोस काम कर रही है। डिप्टी सीएम ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बस्तर पूरी तरह से नक्सलमुक्त होगा और जो लोग अभी भी हथियार लेकर जंगल में हैं, वे भी विकास की मुख्यधारा में लौटेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया कि “जो सरेंडर करेगा, उसे सम्मान मिलेगा, और जो हिंसा करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।


