
बिलासपुर शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर लगाई गई लोहे की रैलिंग अब धीरे-धीरे गायब हो रही हैं। कभी शहर की सुंदरता और सुरक्षा की पहचान मानी जाने वाली ये रैलिंग अब चोरी का शिकार बन रही हैं। शहर की प्रमुख सड़कों से रैलिंग उखाड़ ली गई है और जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक नहीं है। सवाल ये उठ रहा है कि आखिर करोड़ों की सरकारी संपत्ति की रक्षा कौन करेगा? पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और एनएचएआई ने वर्षों पहले शहर को आकर्षक और सुरक्षित बनाने के लिए कई सड़कों पर लोहे की रैलिंग लगवाई थीं। शुरुआती दिनों में सड़कें व्यवस्थित और सुंदर नजर आती थीं, लेकिन अब हालात बदतर हो चुके हैं। कई स्थानों पर रैलिंग पूरी तरह गायब हो गई हैं और सिर्फ जंग लगे खंभे बाकी रह गए हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति सकरी-मुंगेली स्टेट हाईवे 130A की है। पुराने खनिज नाके से कानन पेंडारी तक करीब एक किलोमीटर तक रैलिंग चोरी हो चुकी है। यही हाल गांधी चौक, चकरभाठा, हिर्री मार्ग और रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे का भी है। इन इलाकों में हाईटेक सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद चोरी की एक भी घटना कैद नहीं हो पाई। नगर निगम जोन कमिश्नर ने तीन साल पहले रैलिंग चोरी को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी, मगर जांच ठंडे बस्ते में चली गई। जानकारों का कहना है कि लोहे की इन रैलिंग्स को चोर कबाड़ियों को बेच देते हैं और विभागीय अधिकारी इस पूरे खेल से अनजान बने रहते हैं। रैलिंग चोरी से जहां शहर की सुंदरता दागदार हुई है, वहीं सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों की सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या विभाग कार्रवाई करेगा या शहर यूं ही लूटता रहेगा?


