
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब फिर से बच्चों को बारहखड़ी पढ़ाई जाएगी। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने यह फैसला लिया है। इस आदेश के तहत कक्षा पहली और दूसरी में भाषा सीखने के लिए बारहखड़ी को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा, वहीं तीसरी और चौथी कक्षा में इसे रेमेडियल शिक्षण के तौर पर शामिल किया जाएगा।डीपीआई ऋतुराज रघुवंशी ने इस संबंध में सभी संभागीय संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मिशन समन्वयक को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि बारहखड़ी का अभ्यास बच्चों के भाषा ज्ञान और उच्चारण सुधार में अहम भूमिका निभाएगा।शिक्षा विभाग का मानना है कि बारहखड़ी केवल भाषा सिखाने का साधन नहीं, बल्कि बच्चों की बुनियादी समझ को मजबूत करने का एक पारंपरिक तरीका है।डीईओ के अनुसार पहले के समय में बच्चे ‘क, का, कि, की, कु, कू…’ से पढ़ाई शुरू करते थे, जिससे उनका शब्दज्ञान और लेखन कौशल मजबूत होता था।इस कदम से न केवल शिक्षा की पुरानी पद्धति को सम्मान मिलेगा, बल्कि बच्चों की मातृभाषा पर पकड़ भी और बेहतर होगी।


