
शनिवार को गढ़वा बाजा का बाजार सजा रहा। इसमें यादव की टोलियां वादक दलों को अपने साथ रखने के लिए बोलियां लगाते रहे। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के 80 वादक दल बाजार में आए। इसमें सबसे महंगे वादक दल का सौदा तय हुआ। इसमें 8 सदस्य शामिल हैं। देवउठनी एकादशी से अंचल में गढ़वा बाजा की धुन के साथ ही राउत नाच की शुरुआत हुई। शनिचारी में गढ़वा बाजा के लिए राउत बाजार सजा रहा। जहां वादक दलों को अपने दल में शामिल करने बोलियां लगती रही। कहीं सहमति तो कही मानमनौव्वल का दौर चलता रहा। जैसे-जैसे लोगों की बात बनती गई वैसे-वैसे वे वादक दलों और परियों के साथ अपने गांव लौटते रहे। इस अवसर पर पारंपरिक गड़वा बाजा की धुन के साथ उत्सव की भी खुशियां सजती रही।

यादवों का दल अपने परिचितों के घर जाकर गीत-संगीत के साथ आशीष देंगे और लोग उन्हें उपहारों के साथ खुशियों की सौगात देंगे।15 दिन तक राउत नाच की धूम रहेगी। पारंपरिक बाजा के साथ ही कविता और दोहों के साथ घर-घर शुभाशीष की वर्षा होगी। यादव समाज के लोग उच्च पदों में रहकर भी अपनी परंपरा से जुड़कर इससे युवाओं को जोड़ने सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की परंपरा में राउत नाच बेहद खास महत्व रखता है हर साल यहां आने वाले यदुवंशी अपने जौहर का प्रदर्शन करते हैं इस बार भी रावत नाच उत्सव को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है जिस तरह से गढ़वा बाजार में ऊंची कीमतों पर बाजा और वादक तय किए गए हैं वह दर्शाता है कि आज भी राउत नाच की जो उत्साह देखी जा रही है वह बेहद ही लोकप्रिय है इसके साथ ही देवउठनी एकादशी के बाद पहले शनिवार को हर साल बिलासपुर में राउत नाच महोत्सव का आयोजन होता है ऐसे में इस बार भी रावत नाच महोत्सव का आयोजन शनिवार को होगा जिसमें यदुवंशी रात भर अपने जौहर और कला का यहां प्रदर्शन कर परंपरा का निर्वहन करेंगे वहीं श्रेष्ठ यदुवंशी दल को यहां पुरस्कृत भी किया जाएगा


