
बिलासपुर रेल हादसे की जांच के दूसरे दिन सीआरएस बी.के. मिश्रा की टीम की पूछताछ में सुस्ती साफ नजर आई। बुधवार को पूछताछ के लिए 27 रेलकर्मियों को बुलाया गया था, लेकिन पूरे दिन में केवल 7 से ही सवाल-जवाब हो सके। हादसे की रात ड्यूटी पर रहे दो वरिष्ठ अधिकारी राशीराज और शैलेंद्र चंद्र जांच में शामिल ही नहीं हुए। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारी ही जांच में सहयोग नहीं कर रहे, तो महज तीन दिन में जांच पूरी होना कैसे संभव होगा।पहले दिन सीआरएस मिश्रा ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर तकनीकी साक्ष्य और सिग्नल डेटा एकत्र किया था। लेकिन दूसरे दिन की पूछताछ अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। सीआरएस टीम ने जिनसे सवाल किए, उनमें ट्रेन चालक दल, सिग्नलिंग इंजीनियर, कंट्रोल रूम स्टाफ और स्टेशन मास्टर शामिल थे। जांच का फोकस इस बात पर रहा कि हादसे के वक्त सिग्नल की स्थिति क्या थी और क्या संचार प्रणाली में कोई तकनीकी त्रुटि हुई थी।अब जांच का तीसरा और अंतिम चरण सबसे अहम माना जा रहा है, जब जोनल स्तर के अधिकारियों और मंडल कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी। इसके बाद सीआरएस अपनी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपेगा, जिसके आधार पर जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई तय होगी। लेकिन मौजूदा हालात में जांच की रफ्तार जिस तरह धीमी है, उससे यह साफ है कि तीन दिनों में सच्चाई तक पहुंचना मुश्किल ही नहीं, लगभग नामुमकिन लगता है।


