
छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ और कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की संयुक्त अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है। बिलासपुर संभाग सहित प्रदेशभर में कर्मचारी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर डटे हुए हैं। उनकी प्रमुख मांगों में प्रत्येक समिति को तीन लाख रुपये प्रबंधकीय अनुदान, पुनरीक्षित वेतनमान लागू करने और 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भर्ती शामिल है। इसके साथ ही समर्थन मूल्य धान खरीदी में हुई सुखत को मान्यता देने और सुरक्षा व्यय व फसल बीमा में चार गुना बढ़ोतरी की मांग भी की गई है।कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने 28 अक्टूबर को सरकार को ज्ञापन देकर चेताया था कि मांगें पूरी न होने पर वे 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। बावजूद इसके सरकार ने अब तक कोई ठोस पहल नहीं की। इसके चलते प्रदेशभर में सहकारी समितियों का कामकाज ठप हो गया है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक शासन उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, आंदोलन जारी रहेगा।इस हड़ताल का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है। सरकार 15 नवंबर से धान खरीदी अभियान शुरू करने जा रही है, लेकिन समितियों के बंद होने से किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई किसान केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि प्रशासन स्थिति पर सिर्फ नजर बनाए हुए है।कर्मचारी संघों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द उनकी मांगों पर सरकार निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन और उग्र होगा। इधर, किसान शासन और कर्मचारी संघों के बीच की इस रस्साकशी में पिसते नजर आ रहे हैं। अब देखना होगा कि धान खरीदी शुरू होने से पहले सरकार कोई समाधान निकाल पाती है या नहीं।


