
बिलासपुर। जिले में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे खुद कैमरे के सामने बेबस नजर आए और शिक्षकों को सुधारने में अपनी असमर्थता जाहिर की। उन्होंने माना कि बार-बार समझाइश के बावजूद शिक्षकों का रवैया नहीं बदल रहा है। इस बयान के बाद अब बिलासपुर जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा। बिलासपुर जिले में लगातार ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जिनमें शिक्षक शराब के नशे में धुत नजर आ रहे हैं। कुछ शिक्षक तो स्कूल परिसर में ही शराब पार्टी करते और मांसाहार करते देखे गए हैं। इन घटनाओं ने शिक्षा के मंदिर की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इन वीडियो ने न सिर्फ विभाग की छवि धूमिल की है, बल्कि अभिभावकों में भी नाराजगी का माहौल है। डीईओ विजय टांडे ने कहा कि लगातार समझाइश और चेतावनी देने के बावजूद सुधार की गुंजाइश नहीं दिख रही। सवाल यह है कि क्या सिर्फ कार्यालय में बैठकर आदेश देने से व्यवस्था सुधरेगी? क्या अधिकारियों द्वारा स्कूलों का जमीनी निरीक्षण नहीं किया जा रहा? और क्या शिक्षकों में अब अनुशासन का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है?

हर हफ्ते नए वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें नशे में धुत शिक्षक स्कूल के समय शराब पीते या अनुचित हरकतें करते नजर आते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जो अधिकारी अपने ही जिले की स्कूल व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे, क्या वे पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था की कमान थाम पाएंगे? स्थिति यह बताती है कि प्रशासनिक निगरानी में भारी कमी है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय की स्थिति भी प्रशासनिक लापरवाही की गवाही दे रही है। कार्यालय परिसर में चारों ओर गंदगी पसरी हुई है, दीवारों पर पान और गुटखा के निशान स्पष्ट दिखाई देते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि विभाग के भीतर अनुशासन की कमी केवल शिक्षकों में नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी है।अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस पर सख्त कदम उठाएगा या यह लापरवाही इसी तरह जारी रहेगी। निगाहें अब सरकार और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि मौजूदा हालात में बिलासपुर की शिक्षा व्यवस्था और बच्चों का भविष्य दोनों खतरे में नजर आ रहे हैं।


