बिलासपुर रेल हादसा,10 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट नदारद, कांग्रेस का विशाल घेराव अधिकारियों की बेरुखी पर फूटा आक्रोश,मृतकों के परिजनों को मुआवज़ा, घायलों को सहायता और आश्रितों को नौकरी देने की माँग

बिलासपुर रेल मंडल में 4 नवंबर को हुए भीषण रेल हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया।12 लोगों की मौत, 20 से ज्यादा लोग घायल और दस दिन बाद भी न जांच रिपोर्ट आई, न जिम्मेदारी तय हुई। इसी लापरवाही और चुप्पी के खिलाफ शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतर आई। जीएम ऑफिस पर विशाल घेराव किया गया… भारी नारेबाजी हुई।लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात घंटों तक चले इस प्रदर्शन के दौरान रेलवे का कोई भी बड़ा अधिकारी बाहर नहीं आया, यहां तक कि ज्ञापन लेने तक की जरूरत नहीं समझी। 4 नवंबर की दोपहर मेमू पैसेंजर और मालगाड़ी की गार्ड बोगी की जोरदार टक्कर ने 12 परिवारों को हमेशा के लिए अंधकार में धकेल दिया।

20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए और कई की हालत आज भी नाजुक है। हादसे के बाद जांच समिति बनाई गई।सीआरएस बीके मिश्रा ने तीन दिन तक लगातार पूछताछ की,बयान लिए और ऐसा माहौल बना मानो जल्द ही पूरे मामले की तह तक पहुंचकर दोषियों पर कार्रवाई होगी। लेकिन 10 दिन बाद भी न तो रिपोर्ट आई, न किसी अधिकारी को नोटिस, और न ही सुरक्षा व्यवस्था में चूक की कोई आधिकारिक स्वीकारोक्ति।रेलवे की इस खामोशी से बौखलाई कांग्रेस ने शुक्रवार को रामलीला मैदान से विशाल रैली निकालते हुए जीएम ऑफिस का घेराव किया।

हाथों में तख्तियां, पोस्टर और रेल प्रशासन जवाब दो, दोषियों को सजा दो, मृतकों के परिवार के साथ न्याय करो जैसे गगनभेदी नारों से माहौल गरमा उठा। लेकिन हैरानी इस बात की रही कि इतने बड़े जनसमूह और नेताओं की मौजूदगी के बावजूद रेलवे का एक भी अधिकारी बाहर नहीं आया ये दृश्य प्रदर्शनकारियों के गुस्से को और भड़काने वाला था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि रेलवे हादसे को ढकने में लगा है। न मुआवजा दिया, न सहायता, न भविष्य के लिए कोई आश्वासन। कांग्रेस ने मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये, घायलों को 50 लाख रुपये और प्रभावित परिवारों के आश्रितों को रेलवे या संबंधित विभाग में नौकरी देने की मांग की है।

नेताओं ने कहा कि घर उजड़ गए, परिवार टूट गए… और रेलवे पुरस्कार वितरण में लगा है। यह न सिर्फ लापरवाही, बल्कि अमानवीयता है।समस्या की गंभीरता तब और बढ़ी जब कांग्रेसी नेताओं ने एक छोटे बच्चे की बात उठाई जो अपोलो अस्पताल में भर्ती है। उस मासूम के माता-पिता दोनों की इस हादसे में मौत हो चुकी है। उसका पूरा भविष्य अधर में लटक गया है। लेकिन रेलवे ने आज तक उसके लिए एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया। नेताओं ने कहा इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी रेलवे की खामोशी इंसानियत पर सवाल खड़ा करती है। घटना के दिन मुस्कुराते दिखाई दिए एक रेलवे अधिकारी की तस्वीर भी प्रदर्शनकारी साथ लाए थे। यह फोटो भीड़ में आक्रोश की आग को और भड़काने का कारण बनी।

इसके बाद माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि जीएम कार्यालय और डीआरएम कंट्रोल ऑफिस के बाहर भारी आरपीएफ और पुलिस बल तैनात करना पड़ा। गेट को अंदर से बंद कर दिया गया… लेकिन गुस्साए कांग्रेसी गेट पर चढ़कर भी नारेबाजी करते रहे।प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि रेलवे ने जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की, दोषियों पर कार्रवाई नहीं की, मुआवजा और आश्रितों को नौकरी देने का निर्णय नहीं लिया तो आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा रेलवे कमाई और अवार्ड लेने में सबसे आगे, लेकिन जब जिम्मेदारी की बात आती है… तब दरवाजे बंद कर लेता है।

इस विशाल प्रदर्शन में मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया, जिला अध्यक्ष विजय केसरवानी, शहर अध्यक्ष विजय पांडे, जावेद मेहमान, लक्ष्मीनाथ साहू, पार्षद अब्दुल खान, इब्राहिम, प्रदेश महासचिव शिल्पी तिवारी सहित भारी संख्या में महिलाएं और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन देर शाम तक चलता रहा… और जीएम ऑफिस परिसर पूरी तरह पुलिस घेराबंदी में तब्दील हो चुका था। रेलवे की चुप्पी ने इस आंदोलन को और व्यापक बना दिया है, और अब कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता।

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