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गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में NSUI का उग्र आंदोलन, छात्र की मौत और निष्कासन के विरोध में मुख्य द्वार पर चढ़कर किया प्रदर्शन

बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में सोमवार का दिन तनावपूर्ण रहा। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने छात्र की मौत और दो छात्रों के निष्कासन के विरोध में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान माहौल इतना गर्मा गया कि NSUI कार्यकर्ता विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर चढ़ गए और उसे तोड़ने की कोशिश तक की। हालांकि पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती के चलते स्थिति नियंत्रण में रही। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार सुबह से ही तनाव का माहौल देखने को मिला।

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन पिछले कई दिनों से एक छात्र की संदिग्ध मौत और दो छात्रों के निष्कासन के विरोध में लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहा था। संगठन का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन तानाशाही तरीके से निर्णय ले रहा है और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सोमवार को जब विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में बड़ी संख्या में NSUI कार्यकर्ता और जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष विजय केसरवानी विश्वविद्यालय का घेराव करने पहुंच गए।

उग्र प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ता मुख्य द्वार के ऊपर चढ़ गए और गेट तोड़ने की कोशिश की। स्थिति को देखते हुए पहले से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और विश्वविद्यालय सुरक्षा गार्ड तैनात थे, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। पुलिस की सतर्कता के कारण कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। बाद में NSUI के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से मुलाकात कर निष्कासन आदेश और छात्र की मौत के मामले में उचित कार्रवाई की मांग की।

हालांकि विश्वविद्यालय में जिस छात्र की मौत के मामले पर पूरा हंगामा हो रहा है उसे संबंध में पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि मामले की जांच चल रही है और इस पर विश्वविद्यालय के लापरवाही सामने आई है इस पर कार्रवाई की जा रही। वहीं विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि दोनों छात्रों का निष्कासन विश्वविद्यालय नियमों के अनुसार किया गया है।

पहले उन्हें समझाया गया, लेकिन व्यवहार में सुधार न होने पर कार्रवाई करनी पड़ी। छात्र मौत मामले में भी प्रबंधन ने कहा कि पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग किया जा रहा है और जांच एजेंसियों के निर्णय पर आगे की कार्रवाई होगी। हालांकि इन सबके बीच शिक्षा से मंदिर में किस तरह से आज का दिन हो हंगामा में भर रहा वह दर्शाता है विश्वविद्यालय में सब कुछ सही नहीं चल रहा है छात्रों का अपना तर्क है विश्वविद्यालय प्रबंधन का अपना तर्क है दोनों ही तर्क के बीच अगर बीच का रास्ता निकल जाए तो बेहतर है ।

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