
दयालबंद स्थित मधुबन क्षेत्र में खाद्य विभाग की टीम ने एक गुप्त सूचना पर दबिश दी। एक रिहायशी मकान में अवैध रूप से डंप किए गए 353 नग गैस सिलेंडर बरामद किए गए हैं। इनमें कुछ भरे और अधिकांश खाली सिलेंडर शामिल हैं। विभाग ने फिलहाल सभी सिलेंडरों को लावारिस हालत में जब्त कर लिया है और पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है। शहर में गैस सिलेंडरों के अवैध भंडारण और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतों के बीच खाद्य विभाग की टीम ने बुधवार को दयालबंद के मधुबन क्षेत्र में छापामार कार्रवाई की। टीम जब मौके पर पहुंची, तो एक मकान के भीतर सिलेंडरों का अंबार देख अधिकारी भी दंग रह गए। गिनती के दौरान वहां कुल 353 सिलेंडर पाए गए, जिनमें 253 छोटे (कमर्शियल/पोर्टेबल) और 100 नग 14.2 किलो वाले घरेलू खाली सिलेंडर शामिल हैं।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इन सिलेंडरों का संबंध जूना बिलासपुर स्थित हर्ष किचन केयर के संचालक हर्ष गुप्ता का बताया जा रहा है। मालूम हो की है कि हर्ष किचन केयर पर खाद्य विभाग की टीम पूर्व में भी दबिश दे चुकी है। उसे दौरान तीन बड़े व तीन छोटे सिलेंडर मिले थे।वर्तमान दबिश के दौरान मौके पर कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं था, अधिकारियों की माने तो उन्होंने हर्ष गुप्ता को फोन किया था लेकिन वह मौके पर नहीं पहुंचे, जिसके चलते अधिकारियों ने सभी सिलेंडरों को लावारिस संपत्ति के रूप में जब्त कर लिया है। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि रिहायशी इलाके में इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडरों को रखने का क्या उद्देश्य था और इसके पीछे कोई बड़ा अवैध रिफिलिंग रैकेट तो काम नहीं कर रहा है। मामले में संचालक को नोटिस जारी कर दस्तावेजों की मांग की जाएगी। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की तैयारी है। मकान के भीतर 353 सिलेंडरों का भंडारण किसी बड़े खतरे से कम नहीं था। घनी आबादी वाले मधुबन क्षेत्र में इस तरह गैस सिलेंडरों को डंप करना सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है। यदि कोई छोटी सी भी अनहोनी होती, तो पूरे इलाके में भारी तबाही मच सकती थी। विभाग अब मकान मालिक और संचालक की भूमिका की जांच कर रहा है।यह पहली बार नहीं है जब हर्ष किचन केयर का नाम गैस संबंधी अनियमितताओं में सामने आया है। पहले भी विभाग की टीम यहां दबिश दे चुकी है, लेकिन आज मिली बड़ी खेप ने विभाग की सक्रियता बढ़ा दी है। संदेह जताया जा रहा है कि इन सिलेंडरों का उपयोग अवैध रिफिलिंग या ऊंचे दामों पर कालाबाजारी के लिए किया जाना था।




