दुर्ग। हे श्रृंगार, हास्य, व्यंग विधा के उत्कृष्ट मां सरस्वती साधक, लयबद्ध कंठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले, शांत स्वभाव के रोमांटिक कवि.. आप अपनी लेखनी मे इन अवगुणों की जगह चरण वंदना, चाटुकारिता, एवम चापलूसी पराक्रम की परिक्रमा के गुण मे दक्षता हासिल कर लेते तो आज आप “सदभावना भोकवाधिराज अलंकरण दुर्ग” के प्रथम संस्करण के स्थान पर किसी राष्ट्रीय स्तर के सम्मान से नवाजे जाते। सभावना संयोजक राजीव अग्रवाल द्वारा विभिन्न टीवी चैनलों एवम साहित्यिक मंचों में सुने जाने वाले सुप्रसिद्ध कवि श्री किशोर तिवारी के लिए अभिनंदन पत्र का अंश गजानन नगर दुर्ग मे आयोजित तिलक होली एवम कवि सम्मेलन में जब पढ़ा गया तो श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। श्री किशोर तिवारी का सदभावना टीम द्वारा भोकवाधिराज का बैज एवम होलियाना भोकवाधिराज का विशिष्ठ परिधान पहना कर सदभावना भोकवाधिराज अलंकरण पत्र सौंपा गया। वरिष्ठ कवि श्री आलोक शर्मा को साहित्य सेवा हेतु सदभावना आत्मीय सम्मान प्रदान किया गया। महिला संयोजिका श्रीमती अलका अग्रवाल एवम टीम द्वारा सुश्री शाहीन अंसारी, श्रीमती शुचि भवी, सहित सभी कवियों का तिलक एवम टोपी लगाकर स्वागत किया गया। तिलक होली पर्व की काव्य संध्या में शामिल श्री आलोक शर्मा ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर.. बेटी थोड़ा धीरे गाड़ी चलाव.. के विषय पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

श्री किशोर तिवारी की रचना..
बहुत दिनों के बाद किया है
हमने भी फरियाद किया है
अभी अभी है हिचकी आई
उसने हमको याद किया है।
एवम सुश्री शाहीन अंसारी की रचना
जब घर रंगे जाए तो दिपावली और
जब घरवाले रंगे जाए तो हुई होली.
जैसी उत्कृष्ट प्रस्तुति एवम सूर्यकांत गुप्ता का छतीसगढ़ी व्यंग छंद…
राज सुख पाए बर.. सत्ता हथियाए बर,
बाँटत बसन दारु, रुपिया मितान हे।
खुले हे दुकान, जघा जघा जी सियान,
जहाँ बिकथे इमान, काला परत जियान हे।

लोगो की खूब वाहवाही बटोरी। डॉ. संजय दानी की लव मैरिज पर छतीसगढ़ी व्यंग एवम श्री सुशील यादव द्वारा मै सपनों का ताना बाना अकेले कुछ यूं बुना करता हूं. एवम सूची भवी की पंजाबी लोक संस्कृति की रचना सराही गई। विगत पंद्रह वर्षों से बिलासपुर में होली अवसर पर सदभावना भोकवाधिराज एवम जोजवानंद अलंकरण की तर्ज पर दुर्ग मे आरंभ हुए कार्यक्रम को लोगो ने काफी सराहा।


