शहर में पेट्रोल ऑटो संघ और डीजल ऑटो संघ की मोनोपोली, ई रिक्शा वालों को बस स्टैंड, रेलवे में खड़े होने तक नहीं दे रहे।

ई -रिक्शा के आ जाने से बहुत सी महिलाएं भी अब ऑटो रिक्शा चलाने लगी हैं। लेकिन लोकल स्तर पर ई-रिक्शा चालकों को कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। बिलासपुर ज़िले में तकरीबन 4000 ई रिक्शा चलते हैं। ई रिक्शा चालकों ने बताया कि शहर में पेट्रोल ऑटो संघ और डीजल ऑटो संघ की मोनोपोली चल रही है।

सबसे ज़्यादा सवारी मिलने वाली जगहों, जैसे बिलासपुर रेलवे-स्टेशन और बस स्टैंड में डीजल और पेट्रोल ऑटो चालक इन्हें खड़े तक नहीं होने देते। शहर की तकरीबन सभी भीड़ वाली जगहों का यही हाल है। ई रिक्शा चालकों ने बताया कि इस बात का विरोध करने पर उनके साथ मारपीट तक की जाती है। ई रिक्शा चालको ने कहा कि शहर में कहीं भी उनके लिए स्टैंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है और मुख्य मुख्य जगहों पर उनके जाने की मनाही के कारण उन्हें सवारियां नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें गुजर बसर करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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