बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के चपेट में अनाज देने वाले हरियाली खेती भूमि का विलीनीकरण।
भू माफियाओं के चलते हरे-भरे अनाज देने वाले खेत तबाह होते जा रहे हैं, जहां पहले लहराते फसल हुआ करते थे अब वही भू माफियाओं की गिद्ध नजर पड़ गई है। लोगों को अनाज देने वाले खेत अब प्लाटिंग की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। शहर से लगे आसपास के गांव जहां धान, गेहूं, सब्जियां उगाई जाती थी, और लोगों तक अनाज पहुंचता था, वहा अब गिट्टी, मुरुम, रेत डालकर पाटा जा रहा है।

जमीन बेचकर ज्यादा लालच के चक्कर में हरे भरे खेतों को काटकर बेचने का धंधा किया जा रहा है। आप देख सकते हैं बिरकोना का यह खेत पिछले साल का है यहां इसी सीजन में रबी के रूप में धान की फसल ली जाती थी, अब इस तस्वीर को देखिए इसे भूमाफियाओं ने किसानों से खरीद कर प्लाटिंग करने की तैयारी कर ली है। चारों तरफ बाउंड्री वॉल बनाए जा रहे हैं अब यहां जल्द ही भवन कॉलोनी तैयार हो जाएंगे, प्रश्न उठता है यदि इसी तरह खेत तबाह होते चले जाएंगे तो अनाज कहां से और कैसे मिलेगा, भविष्य के इस भयावह सच पर भी विचार करना होगा और खेतिहर भूमि के संरक्षण में प्रयास करना जरूरी है।




