
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अटल डिजिटल सुविधा केंद्र ने ग्रामीण जीवन में सुविधा, पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय जोड़ा है। पंचायती राज दिवस 2025 पर शुरू की गई इस योजना के तहत जिले की 152 ग्राम पंचायतों में एक साथ केंद्र खोले गए हैं। इनका उद्देश्य है सरकारी सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना ताकि लोगों को प्रमाण पत्र, पेंशन, बैंकिंग और बिल भुगतान जैसे कार्यों के लिए शहर न जाना पड़े।

पहले जहां ग्रामीणों को जाति, आय या निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ब्लॉक या जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता था, वहीं अब यह सभी सेवाएं गांव के अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों पर ही उपलब्ध हैं। इन केंद्रों में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंकिंग सेवाएं, सरकारी योजनाओं की राशि वितरण, बिजली-पानी बिल जमा करने जैसी कई सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इससे न केवल समय और धन की बचत हो रही है, बल्कि गांवों में डिजिटल जागरूकता भी बढ़ रही है।

कोटा ब्लॉक के सीमावर्ती गांव केंदा में इसका सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। यहां के ग्रामीणों ने केंद्र को सहजता से अपनाया है और सिर्फ पांच महीनों में 2 करोड़ रुपए से अधिक का डिजिटल ट्रांजेक्शन हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए 20 किलोमीटर दूर बेलगहना नहीं जाना पड़ता। स्थानीय निवासी चैती बाई, पूर्णिमा मानिकपुरी और दुर्गा कैवर्त ने बताया कि इस केंद्र ने उनके जीवन को आसान बना दिया है। अटल डिजिटल सुविधा केंद्र के ऑपरेटर विरेंद्र कुमार कैवर्त ने बताया कि रोजाना 60 से 70 ग्रामीण केंद्र पर आकर सेवाओं का लाभ उठाते हैं। जिले में अब तक 60,730 से अधिक ट्रांजेक्शन और 17.72 करोड़ रुपए की राशि का लेनदेन दर्ज हुआ है।


