बुधवार सुबह जूना बिलासपुर स्थित एक इलेक्ट्रिकल दुकान में काम करने वाले नाबालिग श्रमिक की लिफ्ट में फंसकर जान चली गई। पुलिस मामले में मर्ग कायम कर जांच कर रही है।

जूना बिलासपुर में विशाल इलेक्ट्रिकल्स की दुकान है। हर दिन की तरह बुधवार सुबह भी दुकान के संचालक भरत हरियानी दुकान पहुंचे। हालांकि उनसे पहले ही दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों ने दुकान खोलकर साफ-सफाई शुरू कर दी थी। दुकान पहुंचने पर भरत हरियानी ने देखा कि लिफ्ट से खून बह रहा है। घबराकर वे लिफ्ट की ओर भागे तो देखा की लिफ्ट में उनके दुकान में काम करने वाला जूना बिलासपुर में ही रहने वाला 15- 16 साल का किशोर सुमित केंवट उर्फ छोटू लहूलुहान पड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि सुमित केंवट की मां भी दुकान संचालक के घर पर काम करती है और उनका बेटा दुकान में काम करता था। बुधवार सुबह भी वह दुकान में मौजूद लिफ्ट के सहारे चौथी मंजिल पर सामान चढ़ा रहा था। आशंका जताई जा रही है कि इसी दौरान किसी कारण से उसने सर बाहर निकाला होगा और फिर दीवार से टकरा जाने से उसकी जान चली गई।


इस घटना से यहां लोगों की भीड़ लग गई । इसकी सूचना कोतवाली थाने में दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग काम किया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है कि आखिर सुमित केवट की जान कैसे गई।


दुकान में काम करने वाले सुमित केंवट की जान क्यों गई, यह भले ही जांच का विषय हो लेकिन इतना तो जाहिर है की दुकान संचालक श्रम कानून के विरुद्ध नाबालिग बच्चों से काम करा रहे थे। इस कारण से दुकान संचालक भी कटघरे में है। इस संबंध में श्रम विभाग पर से भी कार्यवाही की उम्मीद की जा रही है।


दुर्घटना कहकर नहीं होती। जाहिर सी बात है ना तो दुकान संचालक चाहते होंगे कि उनके दुकान में काम करने वाले लड़के के साथ ऐसा हो और ना ही मृतक भी चाह रहा होगा कि उसकी जान इस तरह चली जाए। जाहिर तौर पर यह हादसा है लेकिन हादसे के बाद उन लोगों की भूमिकाओं की जांच जरूर होगी जो इसके लिए कहीं ना कहीं जिम्मेदार है। वैसे भी कम वेतन पर श्रमिक पाने की चाहत में अधिकांश दुकानों में ऐसे ही नाबालिग लड़के लड़कियो से काम कराया जाता हैं, जिनकी मॉनिटरिंग कभी भी जिम्मेदार विभाग के अधिकारी नहीं करते। जब कभी इस तरह की दुर्घटना घट जाती है तब दिखावे के लिए जांच और कार्रवाई का ड्रामा जरूर किया जाता है।


