
बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सरकंडा स्थित शिव वर्दानी भवन में दो दिवसीय विशेष योग साधना शिविर (राजयोग मेडिटेशन) का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों साधक शामिल हुए और उन्होंने आध्यात्मिक अनुभूति के माध्यम से आत्म सशक्तिकरण का संदेश प्राप्त किया।शिविर का उद्घाटन ब्रह्माकुमारी संस्थान के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा दीप प्रज्वलन से किया गया।

कार्यक्रम का विषय “उज्जवल भविष्य का निर्माण हमारे हाथ में है” रखा गया, जिसके तहत जीवन में सकारात्मक सोच, आत्म-बल और ईश्वर से जुड़ाव की महत्ता पर चर्चा की गई। मुख्य वक्ताओं ने कहा कि योग केवल ध्यान की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों में उतरकर परमात्मा से जुड़ने का माध्यम है।युवा विंग के कोऑर्डिनेटर बीके रूपेश ने अपने संबोधन में कहा कि आत्मा की गहराई में जाकर परमात्मा से जुड़ना ही सच्चे योग का सार है। उन्होंने बताया कि जीवन में सफल और सुखी होने के लिए आत्मशक्ति का विकास आवश्यक है।

राजयोग के माध्यम से व्यक्ति अपनी छिपी हुई शक्तियों को पहचानकर विजयी और गुणवान बन सकता है।शिविर में लगभग 500 भाई-बहनों ने भाग लिया। साधकों ने ध्यान साधना और योग अभ्यास के दौरान आत्मिक शांति, शक्ति और ईश्वर से जुड़ाव का गहरा अनुभव किया। विभिन्न गतिविधियों और राजयोग कमेटी के माध्यम से प्रतिभागियों को दिव्य अनुभव कराए गए।कार्यक्रम का संचालन बीके लक्ष्मी, ऊषा और पूजा ने किया। मंच से आध्यात्मिक गीतों और प्रस्तुति के माध्यम से साधकों को प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में बीके आलोक, जीवन, उदय, गंगा और वंदना ने विशेष सहयोग दिया।समापन अवसर पर केंद्र संचालिका राजयोगिनी बहन दीदी ने साधकों को आशीर्वचन दिए और कहा कि आत्मिक शांति से ही समाज में सद्भाव और सकारात्मकता का प्रसार हो सकता है। अंत में उपस्थित साधकों को प्रसाद और भोजन वितरित किया गया। कार्यक्रम का समापन ओम् शांति के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ।


