महान पार्श्वगायक स्वर्गीय किशोर कुमार की जयंती के अवसर पर बिलासपुर में उन्हें संगीतांजली प्रदान की गई। क्षेत्र के गायको ने उनके ही गीतों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर बिलासपुर के आईएमए भवन में गायन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

भारतीय फिल्मी पार्श्व गायन के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक कलाकार हुए हैं लेकिन किशोर कुमार उन सबसे जुदा है। फिल्मी दुनिया में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां उन्होंने हाथ नहीं आजमाया, लेकिन पार्श्वगायन के क्षेत्र में उनका हाथ पकड़ सके ऐसा कोई नहीं है। यह इसी से समझा जा सकता है कि 4 अगस्त 1929 में खंडवा में जन्मे किशोर कुमार का 13 अक्टूबर 1987 को निधन हो गया लेकिन आज भी ऐसा कोई दिन नहीं है जब रेडियो, टीवी या सोशल मीडिया पर उनके गीत सुनाई ना पड़े। स्वर्गीय मोहम्मद रफी भी मानते थे कि किशोर कुमार जैसा कलाकार सदियों में एक बार पैदा होता है। 4 अगस्त उनकी जयंती के अवसर पर बिलासपुर में स्व किशोर कुमार गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जहां 60 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बिलासपुर के अलावा रायगढ़, रायपुर, भिलाई, खरसिया, पेंड्रा, तखतपुर, जांजगीर, शिवरीनारायण जैसे क्षेत्र के भी गायको ने उनके गीतों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

निर्णायक शरद पांडे, मधुसूदन चटर्जी और अमित चक्रवर्ती ने सुर, स्वर और भाव के आधार पर उन्हें अंक प्रदान किए । पहले राउंड के बाद फाइनल राउंड के लिए 20 प्रतिभागियों का चयन हुआ। रायपुर के अनिल नायर प्रथम स्थान पर रहे, उन्होंने जब दर्द नहीं था सीने में गाया, तो वही कहना है गाकर बिलासपुर के सोहम चटर्जी दूसरे स्थान पर रहे। बिलासपुर के ही तनिष्क वर्मा तीसरे स्थान पर रहे, जिन्होंने कुहू कुहू बोले कोयलिया गाया। सभी विजेताओं के साथ सभी कलाकारों को मोमेंटो और मेडल प्रदान किये गए। अतिथि सी के जयसवाल, नीलांजन नाथ और रोहित तिवारी ने अतिथियों को पुरस्कार प्रदान किया।

स्वर्गीय किशोर कुमार की जयंती पर बिलासपुर में पीटर मुदुलियर के म्यूजिकल बैंड हार्टबीट द्वारा आयोजन का यह दूसरा वर्ष था, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय कलाकारों को सुनने श्रोता आईएमए भवन में जुटे।


