केंद्र सरकार द्वारा लॉन्च की गई यूपीएस स्कीम अगले वित्त वर्ष में लागू होगी, जिसमें कर्मचारियों को बेसिक सैलरी का 50 प्रतिशत पेशन के तौर पर मिलने का प्रावधान है। इस पर बिलासपुर डिवीजन में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई। बताया गया कि इसके साथ ही ओपीएस एवं एनपीएस की स्कीम भी लागू रहेगी अगर कोई कर्मचारी चाहे तो अपने सुविधा अनुसार एनपीएस से यूपीएस में शिफ्ट हो सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने शनिवार को घोषित यूनिफाइड पेंशन योजना यूपीएस लॉन्च की है। इसे केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सरकार द्वारा लिए गए एक बड़े फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। इसका सीधा असर सरकारी नौकरी करने वाले देश की अर्थव्यवस्था में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले मध्यम वर्ग के एक छोटे से हिस्से पर पड़ने वाला है। यह नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम 1 अप्रैल 2025 यानी अगले वित्त वर्ष से लागू होगी। बिलासपुर रेलवे डिविजन के कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी डॉक्टर अंशुमन मिश्रा, वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक पूनम चौधरी और सीनियर डीसीएम अनुराग सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार की इस नई पेंशन योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों को उनकी नौकरी के आखिरी वर्ष की सैलरी के बेसिक वेतन का 50 प्रतिशत पेशन के तौर पर मिलेगा। इसके अलावा वक्त के साथ उनके महंगाई भत्ते में भी बढ़ोतरी होगी।

यूपीएस अब उन कर्मचारियों के लिए एक विकल्प होगा जो 2004 या उसके बाद सेवा में शामिल हुए थे। भले ही UPS लागू हो जाएगी लेकिन राष्ट्रीय पेंशन योजना एनपीएस भी एक विकल्प के तौर पर बनी रहेगी।एनपीएस के लिए कर्मचारी के मूल वेतन से 10% योगदान की आवश्यकता होती है, जिसमें सरकार 14% का योगदान देती है।

यूपीएस के तहत, सरकार का योगदान बढ़कर 18.5% हो जाएगा, हालांकि केंद्र सरकार के कर्मचारी अपने मूल वेतन और डीए का 10% योगदान देना जारी रखेंगे। केंद्र सरकार के केवल 23 लाख कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ के साथ, सरकार ने मुख्य रूप से नौकरशाही में शामिल लोगों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश की है। यह कदम राज्य सरकारों, संसद के अधिनियमों द्वारा स्थापित केंद्रीय विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के लिए भी लागू हो सकती है, जिसे ध्यान में रखकर ही यह योजना शुरू की गई है।

गौरतलब है कि कैबिनेट मंत्रियों और स्पीकर के चयन से पता चलता है कि पीएम मोदी निरंतरता का संदेश देना चाहते हैं।लेकिन हाल ही में सरकार के कुछ फैसलों से पता चलता है कि लोकसभा चुनावों में 63 सीटें हारने के बाद बीजेपी इस बात को लेकर बहुत संवेदनशील है कि उसे किस तरह देखा जा रहा है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पिछले दो सालों में हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने पुरानी पेंशन योजना OPS को वापस लागू करने का वादा किया था लेकिन अपने लोकसभा घोषणापत्र में इसे शामिल नहीं किया। हालांकि UPS, OPS जैसा नहीं है लेकिन सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए इसके लाभों को OPS के करीब माना जा रहा है।

फिलहाल बता दें कि 80 करोड़ परिवारों को मुफ्त 5 किलो अनाज, गरीबों के लिए घर और गैस सिलेंडर जैसी पॉपुलर योजनाओं के जरिए बीजेपी ने गरीबों के बीच अपनी पैठ बनाई है। वहीं अब मोदी सरकार ने पहली बार सरकारी नौकरियों में कार्यरत मध्यम वर्ग के एक हिस्से को बड़ी राहत दी है, जबकि पिछले 10 सालों में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को खुश होने के लिए कुछ खास नहीं मिला है।


