तेज गर्मी के कारण कानन पेंडारी जू पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या घट गई थी, जो मौसम में हुए परिवर्तन के साथ फिर से बढ़ गयी है। हर साल गर्मी में प्रतिदिन दो हजार से तीन हजार के आंकड़े वाले कानन जू में पर्यटकों की संख्या घटकर 250 से 300 पर सिमट जाती है। इसका असर राजस्व के साथ जू की वह रिपोर्ट प्रभावित होगी जिसे हर साल केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को भेजी जाती है।



अन्य दिनों की तुलना रविवार और सोमवार को मौसम में हुए परिवर्तन की वजह से कानन पेंडारी जू में पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। कानन अधीक्षक बीएस राजपूत ने बताया कि भीषण गर्मी की वजह लोग घरों में दुबके हुए है सड़क तो दूर उद्यान या जू कोई घूमना नही चाहता। यही वजह है कि गर्मी की वजह से जू में रोजाना 400-500 पर्यटक पहुंच रहे थे। लेकिन मौसम में परिवर्तन के बाद जैसे ही मौसम खुशनुमा हुआ कानन पेंडारी जू में पर्यटकों की संख्या बढ़ गयी।अन्य दिनों की तुलना में मौसम परिवर्तन होने के बाद कानन में 1 हजार के पार पर्यटक कानन के वन्य प्राणियों का दीदार करने पहुंचे। पर्यटकों की संख्या में इजाफा के साथ साथ कानन पेंडारी प्रबंधन को अच्छी खासी राजस्व की भी प्राप्ति हुई।


बहरहाल लगातार बढ़ रहे तापमान की वजह से भ्रमण स्थलों पर पूरे समय इनदिनों वीरानी छाई रहती है। इनमें एक कानन पेंडारी जू भी है। शहर से 9 किमी दूर स्थित इस मिनी चिड़ियाघर की एक विशेषता पर्यटको की भीड़ भी है। सोमवार छोड़कर सप्ताह में ऐसा कोई दिन होता जब यहां भीड़ नहीं रहती। जू प्रबंधन के आंकड़ों पर गौर करे तो यहां प्रतिदिन दो हजार से तीन हजार पर्यटक मौज-मस्ती करने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन गर्मी की वजह से यह आंकड़ा 500 के पार नही पहुंच पा रहा है। गिने चुने पर्यटकों के कानन पहुंचने से इसका असर पर्यटकों के प्रवेश शुल्क से प्राप्त राजस्व पर भी पड़ा है। इससे प्रबंधन चिंतित है। लेकिन उससे कही ज्यादा चिंता पर्यटकों के आंकड़ों को लेकर बनने वाली रिपोर्ट को लेकर है। यह रिपोर्ट प्राधिकरण को भेजी जाती है। किसी भी जू के लिए पर्यटकों की संख्या बेहद महत्वपूर्ण होती है। संख्या कम होना मान्यता को प्रभावित करती है।



