
बिलासपुर के चकरभाठा स्थित सुप्रसिद्ध शक्ति धाम जय माँ अम्बे मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी पंजवानी परिवार ने नवरात्रि के अवसर पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए। इस बार आयोजन का महत्व और बढ़ गया क्योंकि मंदिर में लगातार 25 वर्षों से चली आ रही परंपरा अमृत महोत्सव के रूप में मनाई गई। माँ के दरबार में भक्तों की आस्था और समर्पण ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। अष्टमी और नवमीं के पावन अवसर पर मंदिर को भव्य साज-सज्जा से सजाया गया था। महागौरी पूजन, हवन, कन्या पूजन और भोग भंडारे का आयोजन किया गया।

आयोजकों ने बताया कि माँ महागौरी की आराधना करने से सुख, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है और समस्त पापों का नाश हो जाता है। श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन के दौरान 2 से 10 वर्ष की कन्याओं का पूजन कर दान-दक्षिणा और भोजन कराया।मंदिर समिति के अध्यक्ष भागचंद पंजवानी ने कहा कि यह मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना का स्थान नहीं बल्कि भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करने वाला शक्ति धाम है। उन्होंने बताया कि इस बार 200 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए, जिनमें से एक अमेरिका से भी प्रचलित किया गया है। लगातार 25 वर्षों से आयोजित यह उत्सव पंजवानी परिवार और पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है।अध्यक्ष भागचंद पंजवानी ने कहा माँ अम्बे की सेवा से हर मनोकामना पूरी होती है।

यही कारण है कि दूर-दराज से लोग यहाँ आते हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि माँ के आशीर्वाद से इस परंपरा को 25 वर्षों से निरंतर निभा रहे हैं। सेवकों ने बताया कि महाष्टमी और महानवमी पर माँ महागौरी की पूजा करने से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस वर्ष आयोजित हवन और कन्या भोज में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया।कार्यक्रम में शामिल सेवकों एवं श्रद्धालुओं ने भावुक होकर कहा कि यह स्थान सिर्फ मंदिर नहीं बल्कि इच्छाओं का धाम है।

डॉक्टर ने कहा माँ अम्बे की कृपा से यहाँ हर साल चमत्कारिक भक्ति का अनुभव होता है।पंजवानी परिवार की निस्वार्थ सेवा समाज को जोड़ती है और यही माता का सच्चा आशीर्वाद है।नवरात्रि की अष्टमी-नवमीं पर माता के जयकारों, हवन की सुगंध और भक्ति के रंग ने पूरे वातावरण को पावन बना दिया और हर भक्त मंत्रमुग्ध हो गया। शक्ति धाम जय माँ अम्बे मंदिर का 25वां नवरात्र उत्सव आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम बनकर समाप्त हुआ। महागौरी पूजन, हवन और कन्या भोज के साथ गूँजे जयकारों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर माँ अम्बे का आशीर्वाद पाकर लौटे और अगले वर्ष फिर इसी उल्लास व समर्पण के साथ मिलन की कामना की।


