बिलासपुर में अवैध कब्जा और अतिक्रमण के खिलाफ निगम का बुलडोजर एक्शन में है। दूसरे दिन भी निगम की बुलडोजर कार्रवाई जारी रही। साल भर पहले ही इन्हें अटल आवास में मकान आवंटित कर दिया गया था, उसके बावजूद भी वे कब्जा छोड़ने तैयार नहीं थे, अधिकांश लोगों ने तो अटल आवास के मकान को ही किराए में दे दिया है, नोटिस के बाद जेसीबी से मकान को धराशायी किया गया, अब स्मार्ट सिटी का सुंदर शहर अरपापार में भी देखने को मिलेगा, इस बीच कांग्रेस बुलडोजर एक्शन के विरोध में लामबंद हो गई है। इसी कड़ी में पूर्व विधायक शैलेश पांडेय, जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी के साथ कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रभावित स्थल मेलापारा चांटीडीह पहुंचा।

स्मार्ट सिटी बिलासपुर को झुग्गी झोपड़ी मुक्त बनाने की योजना के तहत ही चांटीडीह के मेलापारा में बेजा कब्जा तोड़ने की कार्यवाही दूसरे दिन भी चलती रही, यहां 1160 कब्जाधारियों को साल भर पूर्व 2021 में ही पक्के मकान अलॉट करा दिया गया हैं, अशोकनगर, बहतराई में बने अटल आवास में मकान उपलब्ध करा दिया गया था, उसके बावजूद भी मकान को किराए पर देकर वे यहां रह रहे हैं। शुक्रवार को निगम की टीम ने यहां कार्यवाही शुरू की जो दूसरे दिन भी जारी रही, दो सौ लोगो को शनिवार को शिफ्ट किया गया हैं। इसमें निगम के वाहन ने भी भरपूर सहयोग किया, उनके सामानों को अटल आवास शिफ्ट करने निगम कर्मी भिड़े रहे।

कांग्रेस की सरकार में अशोकनगर में भी इसी तरह अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही हुई थी, अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार में भी विकास के लिए कार्यवाही की जा रही है, जिसे लेकर कांग्रेसी इसका विरोध कर रहे हैं, निगम अधिकारियों से कार्यवाही रोकने पूर्व विधायक शैलेश पांडे, विजय केसवानी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसियों ने विरोध जताते हुए अधिकारी से ही बहस करते रहे ,इस दौरान निगम अधिकारी ने बताया कि सभी को पक्के मकान उपलब्ध करा दिए गए हैं, उसके बावजूद कांग्रेसी दिखावे की राजनीति करते दिखाई दिए।


शहर का विकास शहर वासियों के लिए ही है। उसके बावजूद विपक्षी पार्टियों द्वारा इन भोले भाले लोगों को भड़का कर यहीं जमे रहने कहा जा रहा है, तभी तो कब्जाधारी इस कार्यवाही का विरोध कर रहे हैं,जबकि उन्हें पक्के मकान मिल चुके हैं, उसके बावजूद वे हटने का नाम नहीं ले रहे हैं और निगम की कार्यवाही का विरोध कर रहे हैं। झुग्गी झोपड़ी से अच्छा पक्का मिलने के बावजूद विरोध समझ से परे हैं, वही एक ही परिवार में चार मकान उपलब्ध कराने के बावजूद परिवार के लोग और मकान देने जीद पर अड़े हैं, तो वहीं कुछ छूट भैया नेता भी अपनी राजनीतिक रोटी सेकते दिखाई दिए।

गौरतलब हैं स्लम बस्तियों को हटाने के लिए केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तभी योजना लाई गई थी। भाजपा सरकार में भी इसे पीएम आवास शहरी के रूप में जारी रखा गया है। ईरानी मोहल्ले के लोगों को भी फ्लैट का आवंटन हो चुका है। कब्जा से सरकारी प्रोजेक्ट के लिए भी काम शुरू नहीं हो पा रहा था। अब यहां से मकानों को हटाकर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और गार्डन बनाया जाएगा।

ध्यान रहे एकीकृत आवास और स्लम विकास कार्यक्रम के तहत 144 करोड़ रुपए में 6180 फ्लैट बनाए हैं। इनमें से 6130 का आवंटन हो चुका है। नगर निगम के सर्वे के अनुसार इनमें से 390 लोगों ने अपना फ्लैट किराए पर चढ़ा दिया। 150 ने मकान बेच दिया। इसमें ईरानी मोहल्ले के लोग भी शामिल हैं। जिन्होंने अपना फ्लैट बेच दिया है, उन्हें दोबारा योजना के तहत आवंटन नहीं होगा।
हालांकि अब कांग्रेसियों ने यहां पहुंचकर इसे आंदोलन का रूप देने की कोशिश की है लेकिन जब इन मकानों को तोड़ने की पहल हुई थी तब राज्य में कांग्रेस की ही सरकार थी ऐसे में अब केवल राजनीति के लिए विरोध करना उचित नहीं है। योजनाओं को पूरा करने सरकार को सरकारी जमीन की जरूरत है। ऐसे में व्यवस्थापन के बाद अगर उन्हें हटाने की कवायद हो रही है तो निश्चित ही इसमें सभी को सहयोग करना चाहिए।


