छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार ने शराब की FL-10 लाइसेंस व्यवस्था को खत्म कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद इस बात की चर्चा सबसे ज्यादा है कि शराब खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर इसका क्या असर होगा? प्रदेश में इस नई व्यवस्था के लागू होने से क्या फायदा होगा, आखिर FL-10 लाइसेंस क्या होता है, इस लाइसेंस की आड़ में लिकर स्कैम से संबंधित सभी सवालों के जवाब सिलसिलेवार जानते हैं।

फॉरेन लिकर-10 इस लाइसेंस को छत्तीसगढ़ में विदेशी शराब की खरीदी की लिए राज्य सरकार ने ही जारी किया था। जिन कंपनियों को ये लाइसेंस मिला है, वे मेनूफैक्चर्स यानी निर्माताओं से शराब लेकर सरकार को सप्लाई करते थे। इन्हें थर्ड पार्टी भी कह सकते हैं। खरीदी के अलावा भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम भी इसी लाइसेंस के तहत मिलता है। हालांकि इन कंपनियों ने भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम नहीं किया। इसे बेवरेज कॉर्पोरेशन को ही दिया गया था। इस लाइसेंस में भी A और B कैटेगरी के लाइसेंस धारक होते थे। FL-10 A इस कैटेगरी के लाइसेंस-धारक देश के किसी भी राज्य के निर्माताओं से इंडियन मेड विदेशी शराब लेकर विभाग को बेच सकते हैं। FL-10 B राज्य के शराब निर्माताओं से विदेशी ब्रांड की शराब लेकर विभाग को बेच सकते हैं। इस व्यवस्था से पहले बाजार से शराब खरीदने की जिम्मेदारी बेवरेज कॉर्पोरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ के पास थी। मार्च 2020 में इसे छीनकर सारे अधिकार 3 प्राइवेट संस्थाओं को दे दिए गए।

जानकारी के मुताबिक इस समय कुल 28 कंपनियों ने टेंडर भरा था, जिनमें 8 शॉर्ट लिस्टेड की गई, लेकिन टेंडर 3 को ही मिला। इन तीनों कंपनियों के पास कोई पुराना अनुभव नहीं था। फरवरी 2020 में ही ये कंपनियां बनीं और मार्च 2020 में इन्हें करोड़ों का कॉन्ट्रैक्ट भी मिल गया।वर्तमान में वर्ष 2024-25 के लिए पुरानी व्यवस्था के ही तहत FL-10, A एवं B लाइसेंस धारकों ने 375 ब्रांड का रेट ऑफर किया था, लेकिन इनमें से केवल 165 ब्रांड की आपूर्ति ही वे कर रहे थे। पसंद की ब्रांड नहीं मिलने के कारण शराब उपभोक्ता भी नाराज थे। शराब में बदली गई व्यवस्था 2 महीने में शुरू करने की तैयारी चल रही है। विभाग ने FL-10 लाइसेंसधारी कंपनियों को 2 महीने में स्टॉक खत्म करने के निर्देश दिए हैं। जितना स्टॉक बचेगा, उसे शराब कंपनियों को लौटाया जाएगा। साथ ही सरकार उनकी लाइसेंस फीस भी लौटाएगी।



