
बिलासपुर जिला अस्पताल का पिछला हिस्सा इन दिनों नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। पुनर्वास केंद्र के पास संचालित ओएसटी ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी सेंटर में रोजाना करीब तीन हजार रजिस्टर्ड नशेड़ियों का इलाज होता है, लेकिन इलाज से पहले ही कई नशेड़ी केंद्र के बाहर बैठकर नशे का इंजेक्शन लगा लेते हैं। परिसर में फैली नशे की सामग्री और गंदगी से मरीज और परिजन लगातार खतरे में हैं।वीओ: अस्पताल परिसर में खुलेआम पड़े इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन, सिरिंज, नारपिन की कांच की बोतलें और मेडिकल सुइयाँ किसी बड़े हादसे को दावत दे रही हैं। हालत यह है कि यहां गुजरने वाले किसी भी मरीज या परिजन के पैर में सुई घुस सकती है, जिसका दुष्प्रभाव उन्हें ही झेलना पड़ेगा। परिसर में ऐसी स्थिति ने लोगों में भारी आक्रोश और भय पैदा कर दिया है।जिला अस्पताल आने-जाने वाली महिलाओं और परिवारों में नशेड़ियों की लगातार आवाजाही से दहशत का माहौल है। परिजन बताते हैं कि कई बार नशे की हालत में मौजूद लोग आसपास खड़े होकर माहौल को असुरक्षित बना देते हैं।
इससे मरीजों के साथ आने वालों को अतिरिक्त सतर्कता रखनी पड़ रही है।स्थानीय लोगों और अस्पताल स्टाफ का आरोप है कि इस स्थिति के लिए जिला अस्पताल प्रबंधन और सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार गुप्ता की लापरवाही जिम्मेदार है। क्योंकि ओएसटी सेंटर जिला अस्पताल के अधीन संचालित होता है, ऐसे में इसकी निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की ही बनती है।लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल प्रबंधन खुद परिसर की सुरक्षा और स्वच्छता पर ध्यान नहीं देगा, तो यहां हालात और बिगड़ते जाएंगे। ओएसटी सेंटर के आसपास सुरक्षा गार्ड, नियमित सफाई और नशा करने वालों पर कड़ी निगरानी की व्यवस्था लंबे समय से नहीं की गई, जिसका नतीजा आज पूरे अस्पताल परिसर को भुगतना पड़ रहा है।अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन कब इस गंभीर स्थिति पर ध्यान देता है।ओएसटी सेंटर की निगरानी,परिसर की साफ-सफाई और मरीजों की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल मरीजों और परिजनों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है।


