
सीएमडी कॉलेज में रविवार को वार्ड बॉय और आया भर्ती परीक्षा के दौरान ऐसा अजीबोगरीब दृश्य देखने को मिला,जिसे देख हर कोई हैरान रह गया।दरअसल ड्रेस कोड के चलते एक युवती को परीक्षा हॉल में प्रवेश से रोक दिया गया, जिसके बाद डर और घबराहट में कई युवक परीक्षार्थियों ने अपने शर्ट और टी-शर्ट तक उतार दिए।खुले शरीर परीक्षा केंद्र में दाखिल हुए इन अभ्यर्थियों को देखकर न सिर्फ लोग दंग रह गए, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह घटना चर्चा का विषय बन गई है।विओ — छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा रविवार, 12 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में वार्ड बॉय और आया भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी।

बिलासपुर शहर के सीएमडी कॉलेज केंद्र में परीक्षा शुरू होने से पहले सुरक्षा जांच के दौरान एक युवती को डार्क शर्ट और टी-शर्ट पहनने की वजह से एंट्री नहीं दी गई। इसके बाद केंद्र पर अफरातफरी मच गई। अन्य परीक्षार्थी डर गए कि कहीं उन्हें भी अंदर जाने से न रोक दिया जाए। इसी डर के चलते करीब 10 से अधिक युवक परीक्षार्थियों ने अपने कपड़े उतार दिए और खुले बदन परीक्षा देने के लिए अंदर चले गए।परीक्षा के दौरान पूरा तीन घंटे तक ये परीक्षार्थी बिना शर्ट-टी-शर्ट के परीक्षा देते रहे। जब परीक्षा समाप्त हुई, तो वे उसी हालत में बाहर निकले। कई लोग कैमरा देखकर मुँह छिपाने लगे, तो कुछ हँसते हुए भागते नज़र आए। यह नज़ारा देखने वाले हर व्यक्ति के लिए चौंकाने वाला था। कॉलेज प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठना भी लाज़मी है।परीक्षा केंद्र के बाहर भी बदइंतजामी साफ दिखी। केंद्र से करीब 20 मीटर दूर परीक्षार्थियों के जूते, चप्पल, पर्स, पानी की बोतलें और अन्य जरूरी सामान खुले में बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के फेंक दिए गए थे। पूरे तीन घंटे तक ये सामान भगवान भरोसे खुले मैदान में पड़ा रहा।

कई परीक्षार्थी परीक्षा खत्म होते ही अपने कपड़े और जूते ढूंढने में जुटे रहे। सुरक्षा और व्यवस्था दोनों का हाल बुरा था।खुले शरीर परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों ने मीडिया के सामने कहा कि शासन-प्रशासन द्वारा लागू किया गया यह ड्रेस कोड नियम अत्यधिक सख्त और असंवेदनशील है। उनका कहना था कि जांच जरूरी है, लेकिन ऐसी स्थिति में इंसान की गरिमा तक दांव पर लग जाती है। परीक्षार्थियों ने मांग की कि आने वाले समय में शासन ऐसे नियमों पर पुनर्विचार करे, ताकि भविष्य में किसी को ऐसी शर्मनाक स्थिति से न गुजरना पड़े। हालांकि परीक्षा में पूछे गए प्रश्न अपेक्षाकृत सरल रहे, जिससे कई अभ्यर्थियों के चेहरे खिल उठे।इन्हीं में एक परीक्षार्थी पाली क्षेत्र का भी था,जो लंबे समय से बीमार था।उसके हाथ में अब भी नीडल लगी थी, बावजूद इसके वह अस्पताल से सीधा बिलासपुर परीक्षा देने पहुंचा।उसका जज़्बा देखकर कई लोग प्रभावित हुए।लेकिन कुल मिलाकर, इस परीक्षा ने न सिर्फ अभ्यर्थियों की मानसिक परीक्षा ली, बल्कि सिस्टम की लापरवाही को भी उजागर कर दिया।


