तोरवा क्षेत्र स्थित बरम बाबा मंदिर में रविवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व पारंपरिक रूप से मनाते हुए गुरु पूजन और दीक्षा का कार्यक्रम हुआ संपन्न।

रविवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व पारंपरिक रूप से मनाया गया। इस अवसर पर गुरुजनों और इष्ट देवों की उपासना की गई। इसी कड़ी में तोरवा क्षेत्र स्थित बरम बाबा मंदिर में भी गुरु पूजन और दीक्षा का कार्यक्रम संपन्न हुआ। भारतीय सनातनी परंपराओं में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। तभी तो कभी कहा गया है कि
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय,
बलिहारी गुरु आपकी, गोविंद दियो बताएं

ईश्वर का मार्ग बताने वाले ऐसे ही गुरु को तो साक्षात ईश्वर कहते हुए
गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः

तक कहा गया है। ऐसे ही गुरुजनों के सम्मान और पूजन का पर्व है गुरु पूर्णिमा। जिसे आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। असल में यह ऋषि वेदव्यास का जन्मदिन भी है, जिन्होंने महाभारत, पुराणों और वेदों की रचना की थी। आज का दौर चाहे जो हो लेकिन प्राचीन समय में गुरु के बिना ज्ञान संभव नहीं था। ऐसे ही गुरुजनों की पूजा और उन्हें सम्मान देने के लिए शिष्य गुरु पूर्णिमा पर विशेष आयोजन करते थे। गुरु शिष्य कि वह परंपरा भले ही समाप्त हो गई हो लेकिन वर्तमान में आध्यात्मिक गुरुओं की पूजा अर्चना इसी तारतम्य में की जाती है। इसी क्रम में तोरवा हेमू नगर क्षेत्र स्थित प्राचीन बरम बाबा मंदिर में गुरु पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस पीठ पर मौजूद श्री श्री त्यागी प्रेमदास जी महाराज की पूजा अर्चना उनके शिष्यों और भक्तों ने की। गुरु गद्दी की पूजा अर्चना के साथ यहां दीक्षा प्रदान की गई।

आदि गुरु वेदव्यास के जन्मदिन पर गुरु शिष्य परंपरा का पालन किया गया। सनातनी परंपराओं में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान हासिल है, इसलिए उनकी पूजा भी की जाती है। अपने गुरुजनों के अलावा माता-पिता और देवों के देव महादेव की भी पूजा इस अवसर पर की जाती है।

गुरु शिष्य परंपरा के समापन के बाद वर्तमान में प्रचलित शैक्षणिक परंपराओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर शिक्षकों का भी सम्मान किया जाता है तो वही आध्यात्मिक क्षेत्र में गुरु पूजन, गुरु गद्दी पूजन की परंपरा है।

जीवन में एक सही मार्गदर्शन न हो तो फिर कहीं भी नहीं पहुंचा जा सकता। गुरु ही वह सच्चा मार्गदर्शक है जो न केवल सही रास्ता दिखाता है बल्कि गुरु तो सही और गलत क्या अंतर भी बताता है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजन, ध्यान, साधना प्रवचन और भजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया तो वहीं यहां आयोजित भंडारे में सम्मिलित होकर सैकड़ो श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
21,600SubscribersSubscribe
spot_img

Latest Articles