
बिलासपुर के सरकारी विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धीरे-धीरे बड़ा रूप लेता जा रहा है। छात्र संगठन एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि हर साल करीब 60 लाख रुपये दीक्षांत समारोह के नाम पर खर्च कर दिए जाते हैं, जबकि विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक पूरी नहीं हैं। एनएसयूआई का कहना है कि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय जैसे पं. रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर और हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग,बहुत कम बजट में दीक्षांत समारोह आयोजित करते हैं।

लेकिन बिलासपुर विश्वविद्यालय में लाखों–करोड़ों रुपये खर्च करना छात्रों के साथ सीधी अन्याय है, खासकर जब यहां हॉस्टल तक उपलब्ध नहीं है और कैंपस में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है।छात्रों का आरोप है कि यही कारण है कि विश्वविद्यालय आज तक NAAC मान्यता हासिल नहीं कर पाया है। कैंपस में कई निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं, लैब व लाइब्रेरी में संसाधनों की कमी है और प्रशासन हमेशा बजट की कमी का बहाना बनाता है।सबसे बड़ा झटका इस बात से लगा कि वित्तीय संकट का हवाला देकर विश्वविद्यालय ने अपनी ही कैंपस भूमि पुलिस विभाग के क्वार्टर निर्माण के लिए बेच दी। छात्रों का कहना है कि यह सीधे-सीधे छात्रों के हितों के खिलाफ फैसला है और प्रबंधन इस पूरे मामले में फेल साबित हुआ है।


