
रायपुर की एक मशरूम प्रसंस्करण यूनिट पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और AVA की संयुक्त रेड में 120 बच्चों को अमानवीय हालात से मुक्त कराया गया। 14 से 17 वर्ष आयु के ये बच्चे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, असम और एमपी से ट्रैफिकिंग कर लाए गए थे, जहां उनसे 12–15 घंटे खटाई जाती थी।

AVA की शिकायत पर NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद डीएसपी नंदिनी ठाकुर की टीम ने छापा मारकर बच्चों को सुरक्षित निकाला। बच्चों ने बताया कि उन्हें अंधेरे कमरों में रखा जाता था और फॉर्मलिन जैसे खतरनाक रसायनों के बीच काम कराया जाता था, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता था।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन व AVA ने इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठित मानव तस्करी का मामला है और फैक्ट्री मालिकों तथा इसमें शामिल नेटवर्क पर कड़ी कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके।


