होली का त्योहार खड़ा है और ये मजदूर अभी अपने मेहनताना पाने को भटक रहे हैं।
गांव से आकर शहर में मजदूरी करने वाली रानिया बाई सोरठे ने मीडिया को बताया कि पिछले 22 जनवरी से वे लोग गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में मजदूरी का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोई नर्मदा नाम का ठेकेदार है जो इन्हें लेकर आता है और विश्वविद्यालय में कोई तिवारी नाम के सर हैं जो उनके भुगतान का हिसाब किताब देखते हैं।

इन मजदूरों का कहना है कि पिछले दो महीने से इन्हें इनका वेतन नहीं मिला है। वेतन देने वाले कभी कहते हैं कि ऑनलाइन पेमेंट करेंगे, कभी कहते हैं नगद देंगे, कभी कहते हैं कल देंगे कभी कहते हैं अगले हफ्ते देंगे इस तरह से उन्हें बार-बार घुमाया जा रहा है। पुरुष एवं महिला मजदूरों को मिलाकर 10 से 15 मजदूर हैं जो पिछले दो महीने से गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में वन फॉरेस्ट्री से संबंधित किसी काम में मजदूरी कर रहे हैं जिनका भुगतान उन्हें नहीं किया जा रहा है। सामने होली का त्योहार खड़ा है और ये मजदूर अभी अपने मेहनताना पाने को भटक रहे हैं।



