धान खरीदी से पहले सहकारी कर्मचारियों की हड़ताल जारी, दूसरे दिन भी नहीं थमी नाराजगी सरकार के खिलाफ मोर्चा, बोले वादे पूरे किए बिना अब काम पर नहीं लौटेंगे

प्रदेशभर के सहकारी समिति कर्मचारियों का आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार से शुरू हो चुकी है। मंगलवार, 4 नवंबर को हड़ताल का दूसरा दिन रहा, और कर्मचारियों का उत्साह पहले दिन की तरह ही जोश में दिखाई दिया।बिलासपुर सहित अलग-अलग संभागों से आए सहकारी समिति के कर्मचारी कॉनर गार्डन में टेंट लगाकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक शासन उनकी चार सूत्रीय मांगें पूरी नहीं करता,तब तक आंदोलन जारी रहेगा।सहकारी कर्मचारी समिति संघ के महासचिव रुद्र दत्त तिवारी ने कहा कि सरकार की लापरवाही अब किसानों के लिए भी मुसीबत बन सकती है।उन्होंने कहा, सरकार हमें नजरअंदाज कर रही है, जबकि हम धान खरीदी जैसे अहम काम की रीढ़ हैं।

इस बार हम झुनझुना नहीं लेंगे जब तक लिखित में मांगे पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई कर्मचारी वापस काम पर नहीं लौटेगा।प्रदेश उपाध्यक्ष मीनाक्षी यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने खुद अपने ही फैसले को पलटकर कर्मचारियों के साथ अन्याय किया है। पहले 12 माह की सेवा अवधि को घटाकर 6 माह कर दिया गया, जिससे हजारों कर्मचारियों का भविष्य अधर में है। हमसे 18 सालों से शासन के हर स्तर का काम लिया जा रहा है धान खरीदी, फसल बीमा, सहकारिता विभाग पर अब सरकार हमें अस्थायी बताकर किनारे करना चाहती है, जो अस्वीकार्य है,उन्होंने कहा।कर्मचारियों ने दोहराया कि उनकी चार प्रमुख मांगें धान खरीदी में सुखद भुगतान, बैंक में 50% पदों पर वरिष्ठता आधारित प्राथमिकता, कंप्यूटर ऑपरेटरों का नियमितीकरण, और 12 माह की सेवा बहाली पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।हड़ताल की वजह से 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे सरकार की तैयारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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