नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है लेकिन अब भी प्रथम वर्ष में कई महाविद्यालयों में सीट रिक्त रह गई है, जिसकी वजह से इस सत्र में सभी संस्थाओ में सीट खाली रहने से यह स्पष्ट नजर आ रहा है कि विद्यार्थियों का रुझान नियमित महाविद्यालय आने के प्रति घटा है, शासकीय महाविद्यालय हो या अशासकीय महाविद्यालय सभी कॉलेज में सीट रिक्त रह गई है हालांकि इसके पीछे इस बार नई शिक्षा नीति को माना जा रहा है।

क्योंकि नई शिक्षा नीति के बाद विद्यार्थी इसे समझ नहीं पाए जिसकी वजह से संकायों में सीट रिक्त रह गई है हालांकि महाविद्यालय प्रबंधन की माने तो मुख्य विषयों में सीट कम खाली है लेकिन सीट का फूल ना हो पाना कहीं ना कहीं उच्च शिक्षा विभाग को विद्यार्थियों को महाविद्यालय तक लाने की कोशिश नाकाम साबित हो रही है।


खासतौर पर इसका सबसे ज्यादा नुकसान शासकीय महाविद्यालय को हुआ है क्योंकि इस बार उन महाविद्यालय में प्रथम वर्ष में प्रवेश प्रक्रिया बेहद कमजोर रही है जाहिर तौर पर अब आने वाले समय में विद्यार्थियों को महाविद्यालय से जोड़ने उच्च शिक्षा विभाग को नई रणनीति पर काम करना होगा जिससे अगले सत्र में महाविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़े और सीट फुल हो सके।




