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प्रशासन के करोड़ों रुपए लगाने के बाद भी सरकारी स्कूलों में ना मैदान ना कोच, बच्चों से मेडल की उम्मीद करना कितना सार्थक?

बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेलों की अलग अहमियत है। लेकिन लापरवाही के कारण सरकारी स्कूलों में न ही खेल का मैदान और न ही कोच। ऐसे में बच्चों का खेल के प्रति रुझान कम होता जा रहा है। शहर के कई सरकारी स्कूलो से मैदान गायब हो चुके हैं। इसमें मिशन स्कूल, तिलक नगर स्कूल, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल, छत्तीसगढ़ तिलकनगर स्कूल उच्चतर माध्यमिक सहित कई शासकीय अर्धशासकीय स्कूल शामिल है।

एक तरफ राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने खेल का बजट बढ़ाकर सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, जिससे प्रदेश से प्रतिभावान खिलाड़ी आगे बढ़ सकें। जो राज्य सहित देश का भी नाम रोशन करें। लेकिन, शिक्षा विभाग की अनदेखी के कारण स्कूलों में खेल मैदान का अभाव होता जा रहा है। जहां कहीं भी मैदान है उनकी देखरेख न होने से घास और कीचड़ दिखाई दे रहे हैं। खेल के मैदान में चारों ओर मवेशी टहलते या बैठे नजर आ रहे हैं। ऐसे में बच्चों से मेडल की उम्मीद बेमानी है।

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