Homeहमर बिलासपुरप्रशासन के दावे के उलट मोपका गौठान की हालत बेहद दयनीय, गौठान...

प्रशासन के दावे के उलट मोपका गौठान की हालत बेहद दयनीय, गौठान योजना पूरी तरह से फेल।

जिन गोठानों में मल्टी एक्टिविटी के काम होने थे उन गोठनों की हालात बदहाल है, ना शेड की व्यवस्था है और ना शेड सही सलामत है, मोपका के केंद्र में महिलाएं गंदगी के बीच काम करती देखी गई, साफ सफाई के अभाव में मवेशियो की हालत भी खराब दिखाई दी। लोग इन गौठानो का उपयोग खाना बनाने और सोने के लिए भी करने लगे हैं यहां तक की ये शराब खोरी का अड्डा बन गए हैं, केंद्रों के सभी जगह से कीमती सामान चोरी हो गए हैं और देखभाल करने वाला भी कोई नहीं है। गोठानों में गोबर खरीदी होने से लेकर वर्मी कंपोस्ट बनाने का काम बंद हो चुका है, निगम क्षेत्र के मोपका गौठान केंद्र के पड़ताल के दौरान बहुत बड़ी खामी सामने आई, अमूमन सभी जगह के गौठानों की यही स्थिति है वस्तु स्थिति आप खुद देखिये।

जिले में कुल 351 गोठानों में 20 करोड रुपए से अधिक की राशि खर्च की गई थी, प्रत्येक गोठानों पर 8 लाख से 19 लाख रुपया खर्च किया गया, इसके अलावा ₹10,000 प्रति माह रखरखाव के नाम पर अलग से गोठानों के नाम पर भेजा गया, अब पिछले करीब 8 महीने से जिले में ज्यादातर गोठानों की स्थिति सही नहीं है। रखरखाव के आभाव में गोठान बदहाल हो रहे हैं। मोपका के गोठान में शेड का नामोनिशान मिट चुका है और चारे की व्यवस्था तक नहीं है, कचरा छाटाई में लगी स्व सहायता समूह की महिलाएं भी खतरे के बीच काम करने मजबूर है, जो बिना सुरक्षा उपाय के गंदगी के बीच काम करती देखी गई। इसे गोवर्धन महिला स्वास्थ्य समूह संचालित करती है, इस समूह पर प्रतिमाह 2 लाख दस हजार रुपए खर्च किए जाते हैं। केंद्र के निरीक्षण पर पाया कि शासन का पूरा पैसा कचरे में ही जाता दिख रहा है। जब उनके प्रभारी से पूछा गया तो उन्होंने बताया गोबर की खरीदी हो नहीं रही है तो खाद का निर्माण कहां से होगा।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने गांधी जयंती 2 अक्टूबर 2019 को नरवा गरवा घुरवा बाड़ी योजना को लांच किया था, इसी के तहत प्रदेश भर में गोठान निर्माण किए गए, जिस उद्देश्य से गोधन न्याय योजना के तहत शुरू किए गए उस पर शुरू से आरोप लगते रहे। यहां लगाए गए उपकरण बंद पड़े हुए हैं, वही कुछ गाय मौजूद थे उनकी स्थिति भी ठीक नहीं नजर नहीं आई, यहां के संचालक का कहना है कि गाय का इलाज चल रहा है लेकिन स्थिति देखकर नहीं लग रहा था। इससे साफ जाहिर है कि इस योजना को स्थानीय स्तर पर ही पलीता लगाया जा रहा है। इस योजना पर लगे आरोप की जांच की जाए तो एक बहुत बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।

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