बस्तर दशहरा में पूरी हुई विजय रथ परिक्रमा, भीतर रैनी की रस्म, कुम्हड़कोट से रथ का बाहर रैनी महत्व्पूर्ण रस्म अदा

दशहरे पर पूरे देश में रावण का पुतला दहन किया जाता है, तो वहीं बस्तर में विजयदशमी के दिन दशहरा की प्रमुख रस्म भीतर रैनी निभाई जाती है।बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में 75 दिनों तक मनाये जाने वाली एतिहासिक विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे में हर साल विजयादशमी के दिन 8 चक्कों के विशालकाय विजय रथ में बस्तर की आराध्यदेवी दंतेश्वरी के छत्र को रथारूढ़ कर नगर भ्रमण करवाया जाता है, इस वर्ष यह रस्म गुरुवार की देररात निभाई गई। इस रस्म को देखने के लिए भारी बारिश में भी बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी। जहां बस्तर दशहरा पर्व के रथ चोरी के प्रतीकात्मक परंपरा अनुसार देर रात विजय रथ को नगर के बाहरी क्षेत्र कुम्हड़ाकोट में ले जाया गया,जहाँ से शुक्रवार को बस्तर राजपरिवार के सदस्यों द्वारा अपने लाव-लश्कर के साथ कुम्हड़कोट पहुंचते है, और नुवाखानी परंपरा को संपन्न करते है। इस दौरान बस्तर के गोंड,माड़िया जनजाती समुदाय भी राजपरिवार के साथ शामिल होते है। तत्पश्चात विजय रथ को ससम्मान वापस लेकर लौटते हैं,जिसे बस्तर दशहरा पर्व का बाहर रैनी रस्म कहा जाता है।

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