
धमतरी जिला अस्पताल में 1 अक्टूबर को एक महिला ने दुर्लभ विकृति वाले शिशु को जन्म दिया। मेडिकल साइंस की भाषा में इस स्थिति को मरमेड सिंड्रोम सिरेनोमेलिया कहा जाता है। नवजात का वजन मात्र 800 ग्राम था और जन्म के करीब तीन घंटे बाद उसकी मृत्यु हो गई। यह केस छत्तीसगढ़ का पहला, भारत का दूसरा और दुनिया का 300वां मामला माना जा रहा है।डॉक्टरों के अनुसार शिशु का ऊपरी हिस्सा सामान्य था आंख, नाक और हृदय विकसित थे, लेकिन रीढ़ से नीचे का हिस्सा जुड़ा हुआ था। दोनों पैर आपस में फ्यूज होकर जलपरी की पूंछ जैसी आकृति बना रहे थे। इस कारण इसे मेडिकल जगत में ‘मरमेड बेबी’ कहा जाता है। जन्म के बाद शिशु को लाइफ सपोर्ट में रखा गया, लेकिन वह अधिक समय तक जीवित नहीं रह सका।विशेषज्ञ बताते हैं कि यह स्थिति जन्मजात विकृति होती है, जिसमें भ्रूण के निचले हिस्से का विकास प्रभावित हो जाता है। अब तक 1542 से दुनिया भर में केवल लगभग 300 मामले ही सामने आए हैं। भारत में इससे पहले 2016 में उत्तर प्रदेश में ऐसा एक मामला दर्ज हुआ था, लेकिन वह शिशु भी 10 मिनट से ज्यादा जीवित नहीं रह पाया था।प्रसूता का ऑपरेशन करने वाली गायनी विशेषज्ञ डॉ. रागिनी सिंह ठाकुर ने बताया कि उनके नौ साल के करियर में यह दूसरा केस है। उन्होंने कहा कि इस विकृति के पीछे पोषण की कमी, भ्रूण तक रक्त प्रवाह की समस्या, पर्यावरणीय कारक या मातृ मधुमेह जैसे कारण हो सकते हैं। सोनोग्राफी में यह स्थिति पकड़ में नहीं आई और सीधे डिलवरी के दौरान ही सामने आई। यह केस चिकित्सा जगत के लिए अध्ययन का विषय बन गया है।


