
बिलासपुर। शहर के रेलवे स्टेशन के पास स्थित ऐतिहासिक कालीबाड़ी मंदिर में दिवाली के दूसरे दिन मां काली की विधि-विधान से भव्य पूजा अर्चना की गई। लगभग 100 वर्ष पुराने इस मंदिर में बंगाली परंपरा के अनुसार हर साल अमावस्या और दिवाली के अवसर पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दौरान सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। बताया जाता है कि बिलासपुर में मां काली की पूजा की शुरुआत इसी मंदिर से हुई थी। इसके बाद से यहां पर निरंतर प्रतिदिन सुबह और शाम आरती की परंपरा निभाई जा रही है। मंदिर परिसर में रोजाना भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन दिवाली और अमावस्या पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

दिवाली के दूसरे दिन आयोजित विशेष पूजा में बंगाली समाज के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। पारंपरिक ढंग से मंत्रोच्चार, आरती और प्रसाद वितरण के साथ माहौल भक्तिमय बना रहा। मंदिर में दीपों की जगमगाहट और घंटियों की गूंज ने श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण निर्मित कर दिया। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि इस बार भी मां काली की पूजा में सभी पारंपरिक रस्मों का पालन किया गया। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से आए पुजारियों ने पूजा-अर्चना संपन्न करवाई। भक्तों ने मां काली से सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे वर्षों से कालीबाड़ी मंदिर आकर पूजा में शामिल होते आ रहे हैं। उनका विश्वास है कि मां काली की कृपा से जीवन में हर संकट दूर होता है। दिवाली के दूसरे दिन हुई यह विशेष पूजा बिलासपुर शहर में आस्था और परंपरा का प्रतीक बन गई है।


