
शहर की सड़कों का हाल दिन-ब-दिन बदतर होता जा रहा है।जगह-जगह गड्ढों से पटी सड़कें हादसों को दावत दे रही हैं,लेकिन प्रशासन की नजर केवल चालान काटने तक सीमित है।शहर में लगे कैमरे चलती गाड़ियों पर फाइन तो तुरंत थमा देते हैं, पर उन्हीं कैमरों से सड़कों के गड्ढे दिखाई नहीं देते।लोगों का कहना है कि बिलासपुर अब स्मार्ट सिटी नहीं, बल्कि चालान सिटी बन गया है।ट्रैफिक सिग्नल कैमरे पहली गलती पर 2000 रुपये और दूसरी बार सीधे 5000 रुपये का चालान भेज रहे हैं।

वहीं इन चालानों से जमा होने वाली भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल शहर की सड़कों की मरम्मत या विकास कार्यों में होता नहीं दिख रहा।यह पहली बार है कि बिलासपुर की सड़कों की हालत इतने लंबे समय तक खराब रही है और सुधार का कोई ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहा।बारिश खत्म हुए महीनों गुजर गए, लेकिन सड़कों पर गड्ढों की जगह अब झील जैसी खाई बन चुकी है।

हादसे बढ़ रहे हैं, दोपहिया चालक सबसे ज्यादा परेशान हैं, मगर जिम्मेदार विभागों को कोई परवाह नहीं।जनता सवाल उठा रही है आखिर इन चालानों से वसूला जा रहा पैसा जा कहां रहा है।क्या उससे सड़कें नहीं सुधारी जा सकतीं।कब तक शहरवासी राहगीर चालानों का बोझ उठाते रहेंगे और प्रशासन आंखें मूंदे बैठेगा।अब जरूरत है कि शासन सड़क सुधार को प्राथमिकता दे वरना बिलासपुर की जनता अपने गुस्से का चालान जरूर काटेगी।


