छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का बड़ा योगदान है अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में कई योजनाएं पूरे देश में लागू हैं छत्तीसगढ़ में ऐसी ही योजना के तहत गरीबों को मकान दिए गए थे। जिसे अटल आवास योजना नाम मिला था।

बिलासपुर में अटल आवास योजना के तहत दिए गए मकानों का आज बुरा हाल है। जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। अटल आवास योजना के तहत झोपड़ी में रहने वाले लोगों को पक्का मकान दिए गए है। लेकिन मकान देने के बाद ना तो मकान का मेंटेनेंस किया गया और ना ही किसी भी सरकार ने मुड़कर इन लोगों को देखा। हर तरफ से अटल आवास जर्जर हो चुका है। जिसे देखने वाला कोई नहीं है। नगर निगम में इसकी शिकायत करने पर भी किसी ने इस जर्जर आवास को दुरुस्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। हालत यह है कि आवासीय क्षेत्र में चारों तरफ गंदगी फैली हुई है। अटल आवास में रहने वाले लोग अब नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। अटल आवास में रह रहे लोग अपनी समस्याओं को लेकर कई बार शिकायत कर चुके हैं। लेकिन इसका निवारण अभी तक नहीं हुआ है। वही आवास में रहने वाले लोगों के मुताबिक आवास का छत कई जगह से जर्जर हो चुका है। घर के अंदर शौचालय की स्थिति और भी ज्यादा खराब है।

बच्चे जब बिल्डिंग के नीचे खेलते हैं तो हमेशा यह डर सताता है कि कहीं कोई हादसा ना हो जाए। आवास में रहने वाले लोगों ने बताया कि हर पार्टी के पार्षद यहां बने हैं। यहां की समस्याओं से उन्हें अवगत भी कराया गया। आकर भी हमारी समस्या सुने और देखें भी लेकिन आज तक उसका समाधान नहीं निकला। कई परिवार ऐसे भी हैं जो इस नारकीय जीवन से तंग आकर अपना आवास छोड़कर जा चुके हैं। यहां के लोग पानी की समस्या से भी काफी परेशान है लोगों का कहना है बहुत दूर-दूर तक जाकर हमें पानी लेकर आना पड़ता है। एक टैंकर 400 घरों के लिए आती है जिससे पानी की पूर्ति नहीं हो पाती। पिछले कई वर्षों से इस समस्या को हम झेल रहे हैं ।तब जाकर अब अमृत मिशन का काम यहां चालू हुआ है जिसे चालू होने में भी अभी 1 वर्ष का समय लग जाएगा। यानी कि हमें एक साल और पानी की समस्या से जूझना होगा।


गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले आवासहीन परिवार के लोगों के लिए बने अटल आवास में लगभग 17 वर्षों से लोग यहां पर नाली और पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। आवास के चारों तरफ गंदगी फैली हुई है जिसकी वजह से शाम होते ही मच्छरों का आतंक हो जाता है। जिससे कई बार बीमारियां भी फैली है। आवास में रहने वाले लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों में यह जगह नर्क से भी बदतर हो जाती है। सेप्टिक टैंक का पानी घरों में बहता है। गंदी नाली का पानी घर में जाता है ।आवास में शौचालय निर्माण के बाद सीवरेज को व्यवस्थित नहीं किए जाने के कारण लोगों को बाहर शौच के लिए जाना पड़ता है। वहीं जल और नाली की समस्या वर्षों से यहां बनी हुई है।



अटल आवास में नियमित सफाई सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को अस्वच्छ वातावरण में गुजारा करना पड़ रहा है। देवरी खुर्द के इस अटल आवास का निर्माण 2007 में हुआ था। यहां पर कुछ निवासी ऐसे भी हैं जो पिछले 17 वर्षों से रहते हैं और उनका कहना है कि पिछले 17 वर्षों से यहां की हालत जस की तस है। महिलाओं ने बताया कि हम अपने घरों की खिड़की तक नहीं खोल पाते हैं क्योंकि बाहर कचरे का ढेर और बदबू के कारण मच्छरों का आतंक से रहा नहीं जाता। उनका कहना है कि इसकी शिकायत लेकर कई बार हम पार्षद के पास भी गए लेकिन हमेशा हमें यह बोलकर वहां से भगा दिया जाता है कि अटल आवास हमारे अंडर मे नहीं आता है। जिसके कारण पिछले कई वर्षों से यहां के निवासी पानी की समस्या और नाली की समस्या से जूझ रहे हैं।


