हिंदू नववर्ष संवत्सर 2082 का शुभारंभ 30 मार्च को धूमधाम से हुआ। इस अवसर पर मराठी समाज ने परंपरागत पर्व गुड़ी पड़वा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया। गजानंद महाराष्ट्र मंडल में भव्य आयोजन किया गया, जिसमें समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।महिलाओं ने पारंपरिक नऊवारी साड़ी, पेशवाई नथ और गजरा पहनकर विधिवत गुड़ी स्थापना और पूजा-अर्चना की। घरों में रंगोली, आम-अशोक के तोरण और गुड़ी पताका सजाकर शुभकामनाएं दी गईं। मान्यता है कि यह पर्व सृष्टि की रचना, सतयुग के आरंभ और विजय का प्रतीक है।इस पावन अवसर पर मराठी परिवारों में श्रीखंड,पूरनपोली और खीर जैसे पारंपरिक पकवान बनाए गए। साथ ही नीम की कोपल और गुड़ खाकर अच्छे स्वास्थ्य की कामना की गई। पूजा के दौरान सूर्य आराधना, सुंदरकांड, राम रक्षा स्त्रोत और देवी मंत्रों का जाप किया गया।समाज के लोगों ने इस आयोजन को हर वर्ष इसी भव्यता के साथ मनाने का संकल्प लिया। इस उत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाया, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का संदेश भी दिया।


