
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को शहर में जनजातीय दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आदिवासी समाज की ओर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के सदस्य शामिल हुए। शोभायात्रा की शुरुआत जरहाभाटा स्थित आदिवासी छात्रावास से हुई और शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए पुनः छात्रावास में आकर इसका समापन हुआ। सुबह से ही समाज के युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों में उत्साह देखने को मिला।

परंपरागत वेशभूषा में सजे लोग ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य करते आगे बढ़ते रहे।शोभायात्रा के दौरान भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और उनके संकल्पों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। समाज के सदस्यों ने बैनर, पोस्टर और नारों के माध्यम से भगवान बिरसा मुंडा की विचारधारा को प्रचारित किया। स्वतंत्रता और स्वाभिमान के प्रतीक बिरसा मुंडा के आदर्शों को युवा पीढ़ी अपनाए—इस संदेश पर विशेष जोर दिया गया। रास्ते भर लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया और आयोजन की सराहना की।

पूरे कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने अपनी-अपनी भूमिकाएँ निभाते हुए बिरसा मुंडा की जयंती को यादगार बनाने में योगदान दिया। आदिवासी समाज ने इसे अपने गौरव और एकता का प्रतीक दिवस बताते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान और शिक्षाएँ हमेशा लोगों को प्रेरित करती रहेंगी। पूरे दिन शहर में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली और वातावरण उत्साह, उमंग व सम्मान से भर गया।


