भाटिया वाइंस से निकले जहरीले केमिकल की वजह से शिवनाथ नदी के भी जहरीले हो जाने के मामले में एक तरफ जहां हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा है तो वही आम आदमी भी इसे लेकर आक्रोशित है।

धूमा स्थित डिस्टलरी भाटिया वाइंस द्वारा छोड़े गए जहरीले स्प्रिट से शिवनाथ नदी का पानी दूषित होने के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग हर तरफ से उठ रही है। इसी महत्वपूर्ण मामले में सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सरकार की ओर से मुख्य सचिव ने अपना पक्ष रखा। इस मामले में हाईकोर्ट ने आबकारी, पर्यावरण विभाग के सचिव, कलेक्टर, एसपी समेत 7 लोगों को पक्षकार बनाया है। सोमवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। प्रमुख पक्षकार के अधिवक्ता के जवाब के बाद नाराज चीफ जस्टिस ने कहा कि इतनी सारी मछलियां किसानों के पास कहां से आएगी। कोई मरी मछली को नदी में क्यों छोड़ेगा। चीफ जस्टिस ने भाटिया वाइन के अधिवक्ता से पूछा कि शिवनाथ नदी में आपके डिस्टलरी से पानी छोड़ा गया है ना। इस पर अधिवक्ता ने हां में जवाब दिया।

राज्य शासन की ओर से जवाब पेश करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने डिवीजन बेंच को बताया कि एसडीएम बिल्हा ने इसे संज्ञान में लेते हुए पर्यावरण संरक्षण मंडल को पत्र लिखकर जांच के लिए कहा था। जांच कहां तक पहुंची और रिपोर्ट में किस बात की जानकारी दी गई है,विधि अधिकारी कोर्ट को इस संबंध में जवाब नहीं दे पाए। प्रमुख पक्षकार भाटिया वाइन मर्चेंट की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि फैक्ट्री विधिवत अनुमति लेकर चलाई जा रही है। राज्य शासन के अलावा पर्यावरण संरक्षण मंडल के नियमों एवं शर्तों का पालन किया जा रहा है। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि शिवनाथ नदी में जो मछली मरी हुई पाई गई है आसपास के किसानों ने ही मरी मछली को नदी में डाल दिया है। अधिवक्ता ने इस मामले की जांच कराने की मांग कोर्ट से की है। अधिवक्ता के जवाब से चीफ जस्टिस नाराज हुए। मरी मछलियों की फोटो दिखाते हुए कहा कि इतनी सारी मछलियां किसान के पास कहां से आएगी। मरी मछलियां को किसान नदी में क्यों डालेगा। चीफ जस्टिस ने पूछा कि नदी में डिस्टलरी का पानी छोड़ा जा रहा है या नहीं। नदी में छोड़ा गया पानी डिस्टलरी का ही है ना। डिवीजन बेंच ने वाइन मर्चेंट को पक्षकार बनाने का निर्देश रजिस्ट्रार जनरल को दिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तिथि तय कर दी है।

इधर लोगों का मानना है कि यह भाटिया वाइंस के संचालक और पर्यावरण एवं उद्योग विभाग की गहरी चूक है, जहां फैक्ट्री की नाली से होते हुए जहरीला मिथाइल अल्कोहल शिवनाथ नदी के पानी में मिश्रित हो गया। इससे शिवनाथ नदी में मौजूद लाखों मछलियो और जल जंतुओं की मौत हो गई। साथ ही यह पानी पीने वाले 15 से 20 मवेशी भी मारे गए हैं। घटना के 5 दिन बाद भी पानी से तेज दुर्गंध आ रही है। इधर मामले में लीपापोती भी शुरू हो चुकी है। कोर्ट और प्रशासन को भ्रमित करने के लिए मनगढ़ंत कहानी सुनाई जा रही है। बताया जा रहा है कि किसी तालाब में मछलियां मर गई थी और ठेकेदार ने उन मछलियों को लाकर शिवनाथ नदी में फेंक दिया।



इससे अधिक बचकानी कहानी कुछ और नहीं हो सकती। किसी तालाब में अगर मछलियां मरी होती तो उन्हें कहीं और फेंका जाता। किसी तालाब में लाखों की संख्या में मछली हो ही नहीं सकती और उन्हें लाकर नदी में फेंकने का कोई औचित्य भी नहीं है। मरी हुई मछलियां नदी की मछलियां है और सिर्फ मछलियां ही नहीं अन्य जीव जंतु और गायों की भी मौत हुई है। नदी का पानी प्रदूषित हो चुका है, इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि बिल्हा नगर पंचायत क्षेत्र में नदी का पानी फिल्टर करने के बाद भी उसमें से तेज दुर्गंध आ रही है, जिसके कारण से 19 और 20 जुलाई को पानी का सप्लाई नहीं किया जा सका। टंकी की सफाई करने के बाद रविवार को फिर से फिल्टर कर पानी भर गया लेकिन इसमें भी तेज दुर्गंध आने से सीएमओ द्वारा अनिश्चित काल के लिए पानी की सप्लाई रोकी गई है। सभी वार्डों में टैंकर के माध्यम से बोर का पानी सप्लाई किया जा रहा है और डिस्टलरी के हितैषी अलग ही कहानी सुना रहे हैं। आप समझ सकते हैं कि जो पानी फिल्टर करने के बाद भी इस्तेमाल के लायक नहीं है उसमें कितना प्रदूषण हुआ होगा। क्या यह प्रदूषण किसी तालाब में मरी हुई मछलियों को नदी में डालने से हो सकता है ? इसे लेकर पर्यावरण हितैषी बेहद चिंतित है और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



पूरा क्षेत्र भाटिया वाइंस फैक्ट्री से परेशान है, लेकिन बाहुबलियों के आगे उनकी एक नहीं चलती। लेकिन इस घटना ने फैक्ट्री की करगुजारियों को उजागर कर दिया है। इस मामले में अब हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया है, जिससे उम्मीद बढ़ रही है कि पूरे क्षेत्र में पर्यावरण का सत्यानाश करने वाली इस वाइन फैक्ट्री पर इस बार सख्त कार्रवाई होगी।


