बिलासपुर मस्तूरी तहसील के ग्राम गोड़ाडीह, बोहारडीह और लोहर्सी में लगाए जाने वाले एसीसी सीमेंट प्राइवेंट लिमिटेड के प्लांट की जन सुनवाई से पहले ही ग्रामीणों ने प्लांट के लिए बनाई गई ईआईए रिपोर्ट को झूठा बताया है। रिपोर्ट में कंपनी ने मल्हार मंदिर और लोहर्सी के शिव मंदिर तक का उल्लेख नहीं किया है। इस प्लांट से 3 जिले प्रभावित हो रहे हैं। जबकि जन सुनवाई सिर्फ एक जिले में आयोजित की जा रही है।





एसीसी सीमेंट प्लांट लगने का विरोध कर रहे ग्रामीणों का दावा है कि प्लांट की स्थापना होने से यहां के खेत और तबाह और बंजर हो जाएंगे। ग्रामीणों ने गुरुवार को कलेक्टर से शिकायत करते हुए प्लांट नहीं लगने देने ज्ञापन सौंपा। मैसर्स एसीसी प्राइवेट लिमिटेड ने मस्तूरी के ग्राम गोड़ाडीह में सीमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन देने के बाद जिला पर्यावरण विभाग ने इसकी जनसुनवाई की तिथि 18 जून को तय की है। जनसुनवाई से पहले कंपनी की ओर से पेश की गई ईआईए रिपोर्ट पर कई प्रकार के सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस रिपोर्ट में प्लांट से प्रभावित होने वाले 22 गांवों और वहां रहने वालों की संख्या तक दर्ज नहीं है। इतना ही नहीं प्लांट से प्रभावित होने वाले क्षेत्र में मल्हार का प्रसिद्ध मंदिर और लोहर्सी का प्रसिद्ध शिव मंदिर भी आ रहा है लेकिन रिपोर्ट में इनका भी उल्लेख नहीं है।

गांव वालों को बिना जानकारी दिए दूसरे ग्राम पंचायत लोहरसी में 18 जून को जनसुनवाई किया जा रहा है। ग्रामीणों को बिना जानकारी दिए गलत ढंग से कंपनी को स्थापित करने के लिए गलत प्रक्रिया अपनाई जा रही है। ग्रामीणों ने एकसूत्रीय मांग करते हुए पर्यावरण असेसमेंट रिपोर्ट भी प्रदान किया जाए सभी को उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि गांव वाले समझ सके कि जनता को क्या लाभ होना है, रिपोर्ट सही बनाई है या झूठी। जनता के सवालों को संतोषजनक उत्तर देकर नियम कानून के पालन के बाद ही कुछ किया जाए, यदि गलत प्रक्रिया करके गलत तरह से कम्पनी को लाया जाता है, तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा और आंदोलन और भी तेज होगा।



