माता शबरी नवीन गर्ल्स कॉलेज में मनेंद्रगढ़, कोरबा, जशपुर सहित अन्य जगहों की छात्राओं ने प्रवेश लिया है है। इन छात्राओं के अभिभावक सुरक्षा की दृष्टि से इन्हें कॉलेज के हॉस्टल में रखना चाहते हैं। इसके लिए कॉलेज से कई छात्राओं ने आवेदन फार्म लिया है। आवेदन भर कर जमा कर रही हैं। पर कॉलेज इनकी फीस जमा नहीं करवा रहा है और न ही अभिभावकों को ये बता रहा है कि हॉस्टल कब से शुरू होगा। जबकि प्रवेश की तारीख खत्म हो गई है। कक्षाएं शुरू हो गई हैं। लेकिन प्राचार्य के अनुसार अभी छात्राएं त्योहार मना रही हैं। ऐसी स्थिति में छात्राएं अब हजारों खर्च करके बाहर किराए का मकान ले रही हैं।

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने के साथ महाविद्यालय में भी प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो गई है जिसके बाद अब महाविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के शुरू होने से दूर दराज से भी छात्र-छात्राएं यहां पढ़ने पहुंच रही हैं लेकिन उनके रहने के लिए उचित स्थान महाविद्यालय में उपलब्ध नहीं होने से उन्हें बाहर किराए के रूम लेकर रहना पड़ रहा है जिससे उन्हें अतिरिक्त राशि किराए के तौर पर देनी पड़ रही है जबकि महाविद्यालय में हॉस्टल उपलब्ध होने के बाद भी विद्यार्थियों को वह उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जबकि कालेज प्रबंधन का अपना अलग ही तर्क है, वही अभिभावक भी हॉस्टल के लिए भटक रहे हैं, चुकी उनके बच्चों को इसी कॉलेज में पढ़ना है इसलिए खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। वहीं कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि छात्राएं यहां हॉस्टल सुविधा लेना नहीं चाह रही है।

इसी कड़ी में सरकंडा मुख्य मार्ग में मौजूद शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय में 50 सीट का हॉस्टल तैयार किया गया है लेकिन इस महाविद्यालय में अध्यनरत छात्राएं हॉस्टल्स में एडमिशन नहीं ले रही है इस सत्र में भी अब तक केवल 15 आवेदन ही महाविद्यालय प्रबंधन को प्राप्त हुए हैं जिनमें से केवल तीन छात्राओं ने अब तक सहमति दी है उन्होंने अब तक आवेदन जमा नहीं किया है जिससे महाविद्यालय प्रबंधन लगातार छात्राओं को हॉस्टल्स में रहने प्रोत्साहित कर रहा है लेकिन इसमें सबसे बड़ी अड़चन जो देखने को मिल रही है वह इसकी भारी भरकम राशि है दरअसल महाविद्यालय प्रबंधन ने छात्राओं को हॉस्टल लेने की स्थिति में उन्हें ₹4000 की राशि प्रतिमाह जमा करने को कहा है जिसमें ₹3000 खाने के शुल्क के रूप में जबकि ₹1000 मेंटेनेंस के रूप में छात्राओं को जमा करना होगा।

यही वजह मानी जा रही है कि महाविद्यालय में हॉस्टल्स खाली है पिछले 5 से 6 सालों की अगर हम व्यवस्था देखें तो यही स्थिति नजर आती है महाविद्यालय के हॉस्टल 10 से 15 सीट से ऊपर नहीं भर पाते हैं जिस पर अब महाविद्यालय प्रबंधन को विचार करना होगा हालांकि महाविद्यालय की प्राचार्य की माने तो उनके द्वारा लगातार इस दिशा में प्रयास किया जा रहा है लेकिन छात्राओं के द्वारा हॉस्टल को लेकर किसी तरह का कोई रुझान सामने नहीं आ रहा है।




