मोहर्रम के सातवे दिन नगर में चारो ओर शेर सवरियों, ताजियों एवं फातिहाखानी का माहौल देखा गया। मुस्लिम समाज के लोगों ने रोजे रखे और भाजी, मलीदे का लड्डू, शरबत बनाकर अपनी अकीदत पेश की। शेरो के नाच मे बड़े मजमें देखे गए। वर्षो से डल्ला शेर नाच की परंपरा चलती आ रही है। मोहर्रम के सातवे दिन शहर के हर क्षेत्र में डल्ला शेर नाच आकर्षण का केंद्र बना। तारबाहर के डल्ला शेर आकर्षण का केंद्र बने। तारबाहर मे शेरों ने अपने नाच का करतब पेश किया। शहर के अलग-अलग मार्गों पर डल्ला शेर नाच निकाला गया।





