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लीज की मियाद खत्म होने के बाद भी मिशन अस्पताल प्रबंधन द्वारा किराए से की जा रही है मोटी कमाई, अलग-अलग संगठनों ने किया विरोध।

बिलासपुर शहर के बीचो-बीच स्थित बेश कीमती 10 एकड़ जमीन पर स्थित मिशन अस्पताल की भूमि का लीज निरस्त हो गया है। अब यहां सेंट्रल पार्क या पार्किंग बनाने की योजना है, लेकिन अस्पताल संचालक आरोपो को बेबुनियाद बताकर कोर्ट तक जाने की बात कह रहे हैं।

बिलासपुर के मिशन अस्पताल रोड पर स्थित मिशन अस्पताल का लीज 1994 में ही खत्म हो गया है। बताया जा रहा है कि इस अस्पताल का संचालन 1885 से किया जा रहा है लेकिन आखरी बार 1964 में 20 साल के लिए लीज का नवीनीकरण किया गया था। जनकल्याणकारी कार्यों के नाम पर अस्पताल चलाने की बात की गई थी लेकिन जमीन की लीज 1994 को खत्म हो गई, जिसके बाद कई बार नवीनीकरण का प्रयास किया गया। जैकमैन मेमोरियल अस्पताल मतलब मिशन अस्पताल पिछले 20 सालों से बिना किसी अधिकार के ही संचालित हो रही है। 1885 में अमेरिकी मिशनरी ने अस्पताल की स्थापना की थी। अस्पताल का संचालन करने वाली क्रिश्चियन वुमन बोर्ड आफ मिशन ने 1964 में जब इस जमीन पट्टे का नवीनीकरण करवाया था तो वादा किया गया था कि इसका उपयोग जनकल्याण और अस्पताल चलाने के लिए किया जाएगा लेकिन धीरे-धीरे यहां स्वास्थ्य सेवाएं कम होती गई और जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू हो गया। मुख्य अस्पताल तो खंडहर हो चुका है। सामने के हिस्से को एक निजी डॉक्टर को किराए पर दे दिया गया। एक हिस्से में नर्सिंग कॉलेज खोल दिया गया। यहां पिछले कई सालों से वंदना अस्पताल, मिनी चौपाटी, वालहल्ला होटल, यूनिवर्सल मोटर गैरेज और तिब्बती वूलन मार्केट का संचालन किया जा रहा है। यह सब कुछ किराए पर है वंदन अस्पताल से हर महीने 1.75 लाख, चौपाटी से 30,000 होटल से ₹5000 किराया लिया जाता है। यानी सरकारी जमीन पर नियम विरुद्ध खुलकर कमाई की जा रही है और अस्पताल के संचालक इसे मरीज और उनके परिजनों को दी जाने वाली सुविधा बता रहे हैं।

अस्पताल संचालकों का दावा है कि करीब 13 एकड़ क्षेत्रफल में मेडिकल और एजुकेशन के अलावा कुछ भी नहीं है लेकिन सच्चाई कुछ और है। अस्पताल तो अब नाम भर को है। इसके अलावा यहां तिब्बती वूलन मार्केट से लेकर मिनी चौपाटी, होटल, यूनिवर्सल मोटर जैसे दुकान संचालित हो रहे है, जिससे अच्छी खासी कमाई अस्पताल प्रबंधन कर रहा है। अस्पताल के लिए लीज पर ली गई जमीन पर गेराज, रेस्टोरेंट और तिब्बती वूलन मार्केट संचालित होने के साथ यहां विश्वासी मंदिर के नाम पर धार्मिक और धर्मांतरण की गतिविधियां संचालित होने का आरोप लगाते हुए वंदे मातरम संगठन ने कलेक्टर को आवेदन देकर लीज समाप्त करने और जमीन पर कब्जा लेने की बात कही है। इस पर कार्यवाही न होने पर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी गई है।

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि वर्तमान में जमीन का उपयोग होटल चौपाटी और निजी लोगों को किराए पर देने के लिए किया जा रहा है। जनहित का मुद्दा कब का पीछे छूट चुका है। इसलिए इसका लीज बढ़ाने का कोई औचित्य ही नहीं है। राजस्व अभिलेख के मुताबिक नजूल सीट 14 प्लॉट नंबर 201 और 21 करीब 10 एकड़ जमीन क्रिश्चियन वुमन बोर्ड आफ मिशन के नाम पर दर्ज है। इसका विरोध धर्म जागरण समन्वय, जूदेव सेना, हिंदू एकता संगठन, विश्व हिंदू परिषद, श्री राम भिक्षुक धर्म जागरण सेवा समिति, वंदे मातरम मित्र मंडल और निगम के पार्षद भी कर रहे हैं। जिनका कहना है कि जमीन पर कब्जा लेकर यहां ऑक्सीजोन या अन्य जनहित के निर्माण किए जाने चाहिए लेकिन इन आरोपों के बावजूद अस्पताल संचालक तो संस्था द्वारा कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं।

यह सच है कि कभी इस मिशन अस्पताल में मरीज इलाज के लिए आते थे लेकिन वह अतीत की बात हो चुकी है। बिलासपुर में बड़े-बड़े चिकित्सालय और छोटे बड़े सैकड़ो अस्पताल खुल चुके हैं। अब मिशन अस्पताल की ओर कोई रुख भी नहीं करता, लेकिन अस्पताल के नाम पर हासिल 10 एकड़ से अधिक जमीन का व्यसायिक इस्तेमाल संस्था द्वारा जरूर किया जा रहा है। पिछले दिनों कलेक्टर ने भी इसका दौरा किया और मुमकिन है कि जल्द ही इस जमीन पर कब्जा लेकर जनहित में इसका उपयोग हो सके लेकिन जिस तरह से मिशनरी इसका विरोध कर रही है उससे लगता नहीं कि यह सब कुछ आसान हो पाएगा।

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